लगातार गिरते भूजल स्तर के साथ सरकार के माथे पर चिंता की लकीरें भी और गहराती जा रही हैं। पर्यावरण विशेषज्ञ बार-बार आगाह कर रहे हैं कि अगर समय रहते लोग नहीं जागे और पानी नहीं बचाया तो आने वाली पीढ़ियों को पानी नसीब नहीं होगा। सरकारें अपनी ओर से तो प्रयास करती रही हैं लेकिन लोगों की भागीदारी इसमें ज्यादा नहीं रही। इसलिए सरकार ने गांव-गांव में पानी बचाने की अलख जलाने का फैसला किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को जल शक्ति अभियान का शुभारंभ करेंगे। इसी दौरान विकास व पंचायत विभाग की ओर से सभी गांवों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। खंड विकास व पंचायत अधिकारी राजपाल चहल ने बताया कि हर गांव में पहले लोगों को जल शपथ दिलाई जाएगी। उसके बाद पीएम का लाइव भाषण दिखाया जाएगा। हर ग्राम पंचायत अपना जल संरक्षण मसौदा तैयार करेगी, जिसमें जल संरक्षण के लिए किए जाने वाले कार्यों का ब्योरा होगा। जल संरक्षण अभियान की शुरुआत सरकारी इमारतों से होगी। सरकारी स्कूलों व अन्य इमारतों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग का प्रबंध किया जाएगा। गांवों के जोहड़ों की सफाई और पुनर्निमाण करवाया जाएगा, जलकुंभी आदि की सफाई करवाई जाएगी। इसके लिए हर गांव अपनी कार्ययोजना देगा। इस आयोजन का मकसद यह है कि ज्यादा से ज्यादा गांववासियों को इस अभियान में भागीदार बनाया जा सके।
26 गांवों में चल रहा है जल शक्ति अभियान
जिला परिषद की ओर से जिले के 26 गांवों में जल शक्ति अभियान चलाया जा रहा है। यह इंटिग्रेटेड वाटर मैनेजमेंट प्रोग्राम, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत चलाया जा रहा है। डीआरडीए के परियोजना अधिकारी दर्शन राठी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत नए तालाब बनाए जा रहे हैं, पुराने तालाबों की डी-सिल्टिंग की जा रही है। खेतों में सिंचाई के लिए नाले बनाए जा रहे हैं। नहर से तालाब तक अंडर ग्राउंड पाइप बिछाए जा रहे हैं। मिट्टी का कटाव रोकने को तालाबों में रिटेनिंग वॉल्व बनाई जा रही हैं। पौधरोपण किया जा रहा है। साथ ही स्कूलों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग का भी प्रबंध किया जा रहा है। इसके अलावा फील्ड बंडिंग के माध्यम से बारिश के दौरान खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में रोका जाता है। भूजल को री-चार्ज करने के लिए बारिश के पानी का प्रयोग किया जा रहा है। एएससीओ नीना सुहाग ने बताया कि गांव मुंगान और बेड़वा में सरकारी स्कूलों की छत पर रेनवाटर हार्वेस्टिंग का प्रबंध किया गया है। गांव गुग्गाहेड़ी में तालाब का रेनोवेशन कर गो घाट बनाया गया है। गुगाहेड़ी में ही पक्के वाटर चैनल का निर्माण किया गया है। गांव मुंगान में माइनर से तालाब तक अंडरग्राउंड पाइप डाली गई है।
2000 एकड़ धान का रकबा हुआ कम
रोहतक समेत कई जिलों में भूजल स्तर का गिरना चिंता का सबब बन गया है। जिले का खेतीबाड़ी विभाग लगातार ऐसे इलाकों के किसानों को धान न लगाने को प्रेरित करता रहता है। वहीं, गिरते भूजल को देखते हुए राज्य सरकार ने पिछले खरीफ सीजन के दौरान विशेष योजना तैयार की थी। जिसमें किसानों से कहा गया था कि वे धान के बजाय वैकल्पिक फसलें लगाएं क्योंकि धान में पानी की खपत ज्यादा होती है। सरकार ने प्रति एकड़ धान छोड़ कर दूसरी फसलें लगाने पर सात हजार रुपये देने की घोषणा की थी। साथ ही किसानों द्वारा बोई वैकल्पिक फसलों का बीमा अपने खर्च पर करवाने का भी एलान किया था। जिले में बड़ी संख्या में किसानों इस योजना को अपनाया और धान छोड़ दिया। खरीफ सीजन के दौरान जिले में करीब दो हजार एकड़ धान का रकबा शिफ्ट होकर बाजरा और कपास की तरफ चला गया था।