वैक्सीन लगने के बाद भी छह से आठ माह तक रहना होगा सुरक्षित
रोहतक। कोरोना की वैक्सीन लगने के बाद भी छह से आठ माह तक स्वयं को सुरक्षित रखना होगा। सभी को वैक्सीन लगवाने के बाद भी मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग व सैनिटाइजर आदि सुरक्षा उपायों पर ध्यान देना होगा। क्योंकि कोरोना की चैन तोड़ने के लिए यह सब जरूरी है। यह जानकारी कोवैक्सीन की रिसर्च में शामिल पीजीआईएमएस की प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. सविता वर्मा ने कही।
डॉ. वर्मा ने बताया कि कोरोना का संक्रमण समाप्त करने के लिए वैक्सीन लगवाना जरूरी है। इसका उपचार अभी उपलब्ध नहीं है, फिलहाल हमें कोवैक्सीन और कोविशिल्ड से अधिक उम्मीद है। कोविशिल्ड वैक्सीन को दो से आठ डिग्री के तापमान में रखा जा सकता है। इसके लिए हमारे पास कोल्ड चैन उपलब्ध है। टीकाकरण की शुरूआत फ्रंटलाइन वर्कर से होगी। तीन से चार माह में देश में करोड़ों लोगों को यह वैक्सीन लग जाएगी। इसके बाद यह रुटीन में आमजनता को लगेगी।
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सामान्य साइड इफेक्टर हैं
डॉ. वर्मा ने बताया कि वैक्सीन के साइड इफेक्ट में कुछ सामान्य समस्या है, इससे घबराने की जरूरत नहीं है। इंजेक्शन लगने के स्थान पर दर्द, लाली, सूजन व कई बार बुखार तक हो सकता है। कुछ केस में एलर्जिक रिएक्शन तक हो सकता है, इसलिए टीका देने के बाद आधा घंटा रोका जाता है। यदि किसी को रिएक्शन होता है तो तुरंत दवा दे कर ठीक किया जा सकता है। इसलिए सभी को वैक्सीन पर भरोसा करना होगा। क्योंकि महामारी को मात देने के लिए संक्रमितों की श्रृंखला तोड़नी जरूरी है।
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पहली डोज करेगी शरीर को तैयार तो दूसरी एंटी बॉडी बनाना करेगी शुरू
एक्सपर्ट हैं कि कोरोना की सभी वैक्सीन दो डोज में लगेंगी, चाहे वह किसी भी कंपनी की हों। पहली डोज शरीर के अंदर जा कर वैक्सीन के लिए शरीर को सैंसिटाइज करेगी। इसके बाद दूसरी डोज इम्यूनिटी बढ़ाएगी। इसलिए कहा जाता है कि वैक्सीन लगने के दो माह तक अधिक सावधानी की जरूरत है। संक्रमण से बचने के लिए सभी सुरक्षा मानकों को मानना जरूरी होता है। इसमें खाने-पीने में कोई पाबंदी नहीं होती। अभी रिसर्च 18 व अधिक आयु वालों पर है। फिलहाल बच्चों व गर्भवती पर यह रिसर्च नहीं हो रही है। कंपनी लोअर एज में 18 से 12 से नीचे, फिर 12 से आठ और फिर छोटे बच्चों पर इसकी रिसर्च करेगी। बच्चों का इम्यून सिस्टम ठीक होता है, इसलिए उनके लिए घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन चैन तोड़ने के लिए सभी का सुरक्षित रहना जरूरी है।
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एक वैक्सीन लगने के बाद दूसरी वैक्सीन नहीं लगेगी
एक कंपनी की वैक्सीन लगने के बाद व्यक्ति दूसरी कंपनी की वैक्सीन नहीं लगवा पाएगा। हर कंपनी की वैक्सीन की क्षमता में फर्क हो सकता है। लेकिन इम्यून सिस्टम तो शरीर ने ही बढ़ाना है। वैक्सीन लगने के बाद पता चलेगा कि कितने लोगों को संक्रमण हुआ है और किस लेवल का हुआ या नहीं हुआ।