जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने फ्लैट सरेंडर करने के बावजूद 1 लाख 40 हजार रुपये वापस न करने पर हरियाणा हाउसिंग बोर्ड पर 5 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। साथ ही बोर्ड के मुख्य राजस्व अधिकारी व बोर्ड के इस्टेट ऑफिसर को फ्लैट के लिए ली गई राशि 9 प्रतिशत ब्याज के साथ वापस लौटाने के निर्देश दिए हैं। आयोग के चेयरमैन नगेंद्र कादियान ने यह फैसला सुनाया है।
आयोग के मुताबिक चाणक्यपुरी कॉलोनी निवासी पुनीत यादव ने याचिका दायर की थी कि 2018 में उसने हाउसिंग बोर्ड के माध्यम से बीपीएल परिवारों के कोटे के लिए फ्लैट के लिए आवेदन किया था। इसके लिए उसने 70 हजार रुपये हाउसिंग बोर्ड के अकाउंट में जमा करवाए। इसके बाद दूसरी किश्त भी 70 हजार रुपये की दी गई। ड्रॉ के तहत उसे फ्लैट अलॉट किया गया, लेकिन उसने आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण फ्लैट सरेंडर कर दिया। साथ ही हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों से जमा करवाई गई 1 लाख 40 हजार रुपये की राशि वापस मांगी, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। पुनीत ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में याचिका दायर की। इसमें कलेक्टर के माध्यम से सरकार, हाउसिंग बोर्ड के मुख्य राजस्व अधिकारी व बोर्ड के स्थानीय इस्टेट ऑफिसर को पार्टी बनाया गया। मामले की सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने हाउसिंग बोर्ड के मुख्य राजस्व अधिकारी व इस्टेट ऑफिसर को हिदायत दी है कि उपभोक्ता के 1 लाख 40 हजार रुपये 9 प्रतिशत ब्याज के साथ वापस लौटाए जाएं। साथ ही हर्जाने के तौर पर 5 हजार रुपये की राशि दी जाए। ऐसा न करने पर आयोग आगे की कार्रवाई करेगा।