132केवी हाईटेंशन लाइन की शिफ्टिंग के लिए विशाल नगर के छह मकानों के अधिग्रहण की प्रक्रिया सप्ताहभर में पूरी हो जाएगी। प्रशासन ने तय किया है कि अधिग्रहण होने वाली भूमि की रेट का निर्धारण सरकारी सर्कल रेट से नहीं बल्कि मार्केट रेट से होगा। प्रशासन का दावा है कि भुगतान की राशि का ब्योरा रेलवे को भेजा जाएगा। रेलवे से राशि आने पर जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा।
गोहाना रेलवे लाइन पर 4.8 किमी. लंबा एलिवेटेड रेल ट्रैक बनाने का काम अंतिम चरण में है। पटरी बिछाने के बाद तकनीकी जांच भी हो चुकी है। यानी अब रेलवे ट्रैक पर ट्रायल कर सकता है। चूंकि एलिवेटेड रेल ट्रैक के ऊपर से 132केवी की हाईटेंशन लाइन गुजर रही है, ऐसे में बिजली निगम के ट्रांसमिशन विभाग की अनुमति लिए बिना रेलवे ट्रायल भी नहीं कर सकता है यानी अभी भी रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों का संचालन अपने हिसाब से नहीं कर सकता है। इस समस्या के निदान के लिए रेलवे की तरफ से बिजली निगम को करीब एक साल पहले राशि दी जा चुकी है। चूंकि 132केवी की हाईटेंशन लाइन शिफ्टिंग का प्रोजेक्ट कई करोड़ रुपये का है, इसलिए बिजली निगम के ट्रांसमिशन विभाग ने तय किया है कि विशाल नगर में लगे टावर की ऊंचाई बढ़ाने से समस्या का निदान हो जाएगा। चूंकि टावर की ऊंचाई बढ़ानी है, इसलिए उसका आधार करीब 45 फुट चौड़ा बनना है, जिसकी जद में आसपास के छह मकान आ रहे हैं। प्रशासन ने इन छह मकानों के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एसडीएम राकेश कुमार का कहना है कि छह मकानों की जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। इन जमीन के मालिकों को सरकारी सर्कल रेट के हिसाब से नहीं बल्कि ओपन मार्केट रेट के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। एक सप्ताह के अंदर रेट का निर्धारण करके कुल भुगतान का राशि का ब्योरा रेलवे को भेज दिया जाएगा। रेलवे से राशि आने के बाद जमीन का अधिग्रहण कर लिया जाएगा।