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Rohtak News: दो डॉक्टर के भरोसे आपातकालीन विभाग, तीन डॉक्टर ट्रामा ट्रांसफर किए

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रोहतक। पीजीआईएमएस के आपातकालीन विभाग के तीन डॉक्टरों का ट्रॉमा सेंटर में तबादला होने से विभाग महज दो डॉक्टर के भरोसे रह गया है। यह पहली बार हुआ है जब आपातकालीन विभाग का भार दो चिकित्सकों पर किया गया हो।
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हैंगिंग, ड्राउनिंग, प्वाइजनिंग व सर्प दंश के रोजाना करीब 15 से 20 मामले आते हैं। यह मामले किसी भी वक्त आ सकते हैं। जांच रिपोर्ट पर हस्ताक्षर समेत कई काम सीएमओ को करने होते हैं। इसके बाद ही पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ती है। ऐसे में हर वक्त सीएमओ की मौजूदगी जरूरी है। सीएमओ गजेंद्र, सीएमओ गगन और सीएमओ राहुल को ट्रॉमा सेंटर भेजने से यहां की व्यवस्था चरमरा गई है। दो डॉक्टरों को ही 12-12 घंटे काम करना पड़ रहा है।
इसके अलावा हाउस सर्जन को एमएलआर काटने की अनुमति नहीं है। ऐसे में सीएमओ व डीएमएस कब तक 12-12 घंटे सातों दिन एमएलआर (मेडिको-लीगल केस) काटने का काम करेंगे। उनके छुट्टी पर होने पर यह काम प्रभावित होगा। ऐसे में पीड़ित को समस्या होगी। एक सीएमओ कैजुअल्टी का पूरा काम नहीं देख सकता है।
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पहले यह थी व्यवस्था

तबादले से पहले आपातकालीन विभाग में पांच डॉक्टर थे। इस वजह से ड्यूटी रोस्टर बना हुआ था। पांच से एक डॉक्टर की छुट्टी रहती थी। इसके अलावा सुबह, शाम, और रात के लिए डॉक्टरों की शिफ्ट चलती है। साप्ताहिक अवकाश के दिन रिलीवर काम करता है। अब दो चिकित्सकों में रोस्टर बन ही नहीं सकता।

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आपातकालीन विभाग में कम मामले आते हैं। वहीं ट्रॉमा सेंटर में काफी संख्या में दुर्घटना आदि के केस आते हैं। वहां चिकित्सकों की अधिक आवश्यकता है। यही कारण है कि एमएलआर व अन्य चिकित्सकीय कामों के लिए सीएमओ को भेजा गया है।
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-डॉ. एसके सिंघल, निदेशक, पीजीआईएमएस
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