रेवाड़ी। विजय दशमी पर शनिवार की देर शाम श्रीराम के हाथों रावण का वध होने पर अहंकार का अंत हो गया। इसके बाद रावण के पुतले जलाए गए। बेरली कलां में जिले के सबसे ऊंचे 125 फीट के रावण का पुतला जलाया गया। इसके अलावा शहर के हुडा मैदान में शाम 6:12 पर रावण के पुतले जलाए गए।
अधर्म पर धर्म की जीत का पर्व विजय दशमी जिले भर में मनाई गई। रावण दहन से पहले शहर में घंटेश्वर महादेव मंदिर व मक्खनलाल धर्मशाला से लघु सचिवालय के पीछे हुडा मैदान तक शोभायात्रा निकाली गई। इसमें श्रीराम, हनुमान आदि की झांकियां सजाई गई थीं। श्रद्धालुओं ने शोभायात्रा का स्वागत किया। शोभा यात्रा मेन बाजार से होते हुए रावण दहन स्थल हुडा मैदान पहुंची। यहां शाम 6:12 पर श्रीघंटेश्वर मंदिर रामलीला का रावण का पुतला जलाया गया। इसे बाद शाम 6:16 पर मक्खनलाल धर्मशाला की ड्रामेटिक क्लब रामलीला का रावण का पुतला जलाया गया। कुंभकर्ण और मेघनाद का भी पुतला जलाया गया। अहंकार के प्रतीक रावण का अंत होते ही दर्शकों ने जय श्रीराम का उद्घोष किया। बड़ी संख्या में लोग रावण दहन देखने पहुंचे थे। लोगों ने रावण के साथ सेल्फी भी ली। शोभायात्रा के दौरान भी किसी तरह ट्रैफिक बाधित ना हो इसलिए पुलिस की तैनाती की गई थी।
15 दिन में तैयार रावण का पुतला 2 मिनट में हुआ खाक
गांव बेरली कलां में जिले का सबसे ऊंचा 125 फीट ऊंचा रावण का पुतला शाम 6:32 पर जलाया गया। इसके मुख्य अतिथि कोसली के निर्वाचित भाजपा विधायक अनिल यादव रहे। पुतलों में ग्रीन पटाखे लगाए गए थे। रावण दहन होते ही आतिशबाजी होने लगी। पिछली बार यहां 130 फीट ऊंचा पुतला जलाया गया था। समिति के प्रधान जयवीर ने बताया कि रावण के पुतले का मुंह 20 फीट, छत्र की लंबाई 24 फीट और धड़ 70 फीट का था। पैरों की लंबाई 20 फीट थी। 15 दिन तैयार रावण का यह पुतला दो मिनट में जलकर राख हो गया। पुतले को बाहरी कारीगरों ने नहीं बल्कि गांव के लोगों ने खुद तैयार किया था। इस रावण को देखने के लिए शहर से भी बड़ी संख्या में लोग आए थे।।