एमडीयू की परीक्षाओं को लेकर एक बार फिर से सवाल खड़े हो गए हैं। पेपर का प्रारूप बदलने से यूनिवर्सिटी की लापरवाही का खामियाजा कहीं न कहीं परीक्षार्थियों को उठाना पड़ेगा। चार दिन पहले कराए गए एमए फाइनल के चौथे सेमेस्टर का पेपर न केवल पीजी बोर्ड ऑफ स्टडीज, बल्कि एकेडमिक काउंसिल के भी नियमों के खिलाफ है। नियमानुसार, छात्र हितों को देखते हुए पेपर का जो प्रारूप तैयार होना चाहिए, यह पेपर बिल्कुल उसके विपरीत तैयार किया गया।
दरअसल, 20 मई को एमए फाइनल के चौथे सेमेस्टर का अंग्रेजी का पेपर कराया गया था। कोर्स संख्या 16 और ऑप्शन-2 के इस पेपर का नाम वर्क्स इन ट्रांसलेशन (इंडियन) था। नियमानुसार, पेपर को पीजी बोर्ड ऑफ स्टडीज और एकेडमिक काउंसिल के प्रारूप के अनुसार तैयार किया जाता है, लेकिन इस पेपर में प्रारूप का कोई ध्यान नहीं रखा गया है। प्रारूप और इस पेपर का मिलान करें तो इस पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
ऐसा होना चाहिए था पेपर का प्रारूप
नियमानुसार इस पेपर में पांच प्रश्न होने चाहिए थे, जिनके साथ अलग प्रश्न अथवा में दिए जाते हैं। लेकिन पेपर तैयार करने वाले ने इसमें नौ अलग-अलग प्रश्नों की संख्या दे दी। पेपर में पहला प्रश्न अनिवार्य होता है, जिसमें सिलेबस की चारों यूनिट से 2-2 प्रश्न होने चाहिए थे। यानि कि पेपर में पहले सवाल के अंदर ए, बी, सी, डी, ई, एफ, जी, एच आठ प्रश्नों का विकल्प दिया जाता है, जिसमें परीक्षार्थी को चार प्रश्न करने होते हैं। 20 मई को जो पेपर हुआ इसमें केवल छह प्रश्न दिए और उसमें से परीक्षार्थी को चार प्रश्न करने थे। नियम के विरुद्ध दो विकल्पों को हटा दिया गया।
यह हुआ परीक्षार्थियों को नुकसान
पीजी बोर्ड ऑफ स्टडीज और एकेडमिक काउंसिल के प्रारूप के अनुसार, परीक्षार्थी को जहां पहले सवाल में आठ प्रश्नों में से चार प्रश्न करने का विकल्प मिल रहा था वहीं अब इस पेपर में कुल छह प्रश्नों में से ही चार प्रश्नों का विकल्प दे दिया गया। यानी कि दो विकल्प हटा दिए गए। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि अगर किसी कारण परीक्षार्थी इनमें से कुछ प्रश्न नहीं कर पा रहा तो उसके लिए बाकी दो अतिरिक्त प्रश्न का विकल्प भी खत्म कर दिया गया। जिसका सीधा प्रभाव परीक्षार्थी के नंबरों पर पड़ेगा। इसी कारण परीक्षार्थियों में आक्रोश है।
यह मामला मेरी जानकारी में नहीं है। फिर भी इस बारे में परीक्षा नियंत्रक से जानकारी ली जाएगी, तभी कुछ कहा जाएगा।
- प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया, कुलपति एमडीयू