परीक्षा से पहले ही विद्यार्थियों में परिणाम का डर बैठ जाता है। परीक्षा में बेहतर अंक लाने के लिए अभिभावकों व शिक्षकों का दबाव विद्यार्थियों को तनाव में लाता है। परीक्षा हाल में पहुंचने तक विद्यार्थी बार-बार दोहराते रहते हैं। इससे बचने की जरूरत है। विद्यार्थी परीक्षा से तीन घंटे पहले कुछ न पढ़ें। घर का बना ताजा खाना खाएं। दिन में कम से कम तीन बोतल पानी जरूर पीएं। रात भर जागकर पढ़ने के बजाय दिन में एक-एक या दो-दो घंटे पढ़ाई करें। रात को छह घंटे की नींद जरूर लें। विद्यार्थियों को परीक्षा के तनाव से बचाने वाले ये महत्वपूर्ण टिप्स शुक्रवार को पंडित नेकीराम शर्मा कॉलेज के मनोवैज्ञानिक डॉ. दिनेश ने दिए। वे एमडीएन पब्लिक स्कूल में अमर उजाला की ओर से आयोजित संवाद में बोल रहे थे।
स्कूल के सभागार में आयोजित संवाद में उन्होंने कहा कि परीक्षा का तनाव विद्यार्थियों को अवसाद में पहुंचा देता है। विद्यार्थी परीक्षा में कम अंक आने या अभिभावकों की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरने पर परेशान हो उठते हैं, तमाम गलत विचार उनके जेहन में आते हैं। यह गलत है। किसी एक परीक्षा में बेहतर अंक न ले पाना या फेल हो जाना ही सब कुछ नहीं है। विद्यार्थी के लिए अंक लेना महत्वपूर्ण नहीं है। उसके लिए महत्वपूर्ण अपनी समझ व सोच को विकसित करना है। खुद को जीवन जीने के लिए बेहतर बनाना व हर मुश्किल से जूझने के लायक बनाना है। यही शिक्षा का असल मकसद भी है। परीक्षा में अक्सर विद्यार्थी तनाव ग्रस्त हो जाते हैं। वे अनावश्यक बोझ लेकर खुद को मुश्किल में डाल लेते हैं। परेशान होने की जरूरत नहीं है। खुद का आकलन करके परिस्थितियों से जूझने की जरूरत है। आज मुसीबत आना लग रहा है तो कल खुशी के पल भी आपको मिलेंगे, यही सच है।
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पढ़ाई के साथ-साथ मनोरंजन और खेलकूद भी जरूरी
परीक्षा के समय आमतौर पर अभिभावक विद्यार्थियों का खेलना, टीवी देखना, घर से बाहर निकलना सब बंद करा देते हैं। उनका प्रयास दिन भर बच्चों को पढ़ाई के लिए दबाव बनाने का रहता है। इससे न तो वे पढ़ पाते हैं और न ही समझ पाते हैं। जबकि वे थोड़ा-थोड़ा अंतराल के बद पढ़ें, बीच-बीच में पढ़ाई बंद कर खुद को तनाव मुक्त बनाते रहें तो बेहतर है। इसके लिए वे एक, दो या तीन घंटे पढ़ाई के बाद कुछ देर खेलने, टीवी देखने, भाई-बहन या अभिभावकों से बातचीत करें। इससे पढ़ाई का बोझ कम होगा। उन्होंने बच्चों के सवालों के जवाब भी दिए। बच्चों ने अपने तनाव ग्रस्त होने व इससे मुक्ति दिलाने संबंधी सवाल किए। जिसका उन्हें सटीक जवाब देकर बच्चों की जिज्ञासा शांत की।
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मोबाइल एक मशीन है, इसे खुद कर सकते हैं बंद : डीएसपी सुशीला
डीएसपी सुशीला ने विद्यार्थियों से कहा कि कहीं भी किसी से आपको किसी तरह की असुरक्षा का भाव महसूस हो तो अपने अभिभावकों व शिक्षकों को जरूर बताएं। पाबंदियों से न डरें। कोई परेशानी हो तो पुलिस को भी बता सकते हैं। इसके लिए महिला पुलिस व चाइल्ड हेल्प लाइन नंबर सरकार ने विशेष रूप से जारी किए हैं। यहां दी गई जानकारी किसी से भी साझा नहीं की जाती है। यह पूरी तरह गोपनीय है। मोबाइल वर्तमान समय में संचार का बेहतर साधन है। संचार के साथ ऑनलाइन हर काम कर सकता है। खरीदारी करनी हो, किसी से लाइव बातचीत करनी हो या चैट, सब कुछ संभव है। यही सुविधा मुसीबत भी बन गई है। ऑनलाइन सुविधा ने ही धोखाधड़ी के मामले बढ़ा दिए हैं। हमारी लापरवाही इसकी बड़ी वजह है। हम जाने अनजाने अपने निजी फोटो, वीडियो, मैसेज व दूसरी जरूरी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा कर देते हैं। यह एक बार मोबाइल पर आ गई तो फिर इसे कहीं भी कोई भी निकाल सकता है। मोबाइल के टूटने पर भी डाटा को निकाला जा सकता है। यह डाटा गलत हाथों में जाने पर हमारी मुश्किलें बढ़ती हैं। इसलिए ऐसी कोई भी जानकारी मोबाइल या सोशल मीडिया पर न डालें। जीवन आपका अपना है। इसे जरा सी लापरवाही से बर्बाद न करें।
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वाहन चलाते समय सावधानी बरतें
वाहन चलाते समय भी हमें सावधान रहने की जरूरत है। यातायात नियमों की पालना के बगैर सड़क चलना खतरनाक होता है। इसलिए न खुद न अपने परिवार या दोस्तों को नियमों का उल्लंघन न करने दें। हैलमेट नहीं लगाया है तो लगाएं। कार चलाते समय बेल्ट जरूर लगाएं। ये सभी हमारे लिए हमारी सुरक्षा के लिए बने हैं। इसलिए इन्हें प्रयोग करें। बगैर लाइसेंस वाहन न चलाएं। वाहन निर्धारित गति पर ही चलाएं। अधिक रफ्तार जान जोखिम में डाल सकती है। यही नहीं प्रशासन सख्ती बरतते हुए चालान भी करता है। यह राशि काफी अधिक है। इसे भुगतते समय जेब पर असर पड़ता है। इसलिए छोटी सी सावधानी बरत कर सभी खुश रह सकते हैं।
विशेषज्ञों की बातों से प्रेरणा लें बच्चे : नागपाल
स्कूल प्राचार्य डॉ. लिली नागपाल ने भी बच्चों को परीक्षा के तनाव से बचने के लिए प्रेरित किया। यातायात नियमों की पालना का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हर दिन हमें सिखाता है। यह कार्यक्रम भी हमें सिखाने वाला रहा। इसमें काम की अनेक बातें सीखने को मिलीं। आप इतनी छोटी उम्र में ये अहम बातें सुन व जान पाए, इसके लिए आप खुशकिस्मत हैं। यातायात नियमों की पालना कर हम सड़क हादसों पर अंकुश लगा सकते हैं। यही नहीं अपना व दूसरों का जीवन भी सुरक्षित बना सकते हैं। उन्होंने डीएसपी सुशीला व डॉ. दिनेश को एक-एक पौधा देकर सम्मानित किया। इस मौके पर स्कूल कोर्डिनेटर डॉ. ललिता मलिक, स्कूल की शैक्षणिक निदेशक डॉ. मधु जुनेजा, रेखा दलाल, जनकराज समेत अन्य स्टाफ व विद्यार्थी मौजूद रहे।
अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में संबोधित करतीं डीएसपी सुशीला। संवाद
एमडीएन पब्लिक स्कूल में अमर उजाला संवाद में मौजूद अतिथियों के साथ शिक्षक।
एमडीएन पब्लिक स्कूल में अमर उजाला संवाद में मौजुद छात्राऐं। संवाद