रोहतक। देवउठनी एकादशी के साथ ही शादियों का सीजन शुरू हो गया है। ऐसे में बैंडबाजों का कारोबार भी चल पड़ा है। कारोबार से जुड़े संदीप किराड़ ने बताया कि पुरानी और नई पीढ़ी के बीच सामंजस्य बनाने के लिए अगर युवा किसी नए गीत की मांग करते हैं तो उनकी भावनाओं के अनुसार गीत बजाया जाता है।
पुराने गीत को पारंपरिक वाद्य यंत्रों से सुनकर युवा वर्ग का रोमांच और भी बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि आज बैंडबाजे का जिले में हर माह करीब एक करोड़ का कारोबार होने का अनुमान है।
डीजे का बढ़ने लगा चलन
हालांकि, अब डीजे का चलन बढ़ने लगा है। गांव-देहात के ज्यादातर युवा डीजे को पसंद करने लगे हैं लेकिन बैंडबाजे जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मांग शादियों में आज भी बनी हुई हैं। जिले में बैंडबाजे से जुड़ी 200 दुकानें हैं जिनसे काफी संख्या में लोगों को रोजगार भी जुड़ा हुआ है।
शादी के कार्ड हुए डिजिटल
उधर, शादी के कार्ड अब डिजिटल हो गए हैं। कारोबारी यशपाल धींगड़ा ने बताया कि कुछ साल पहले तक शादी के कार्ड की मांग खूब होती थी लेकिन अब परिवर्तन के दौर में शादी के कार्ड भी सीमित बनवाए जाने लगे हैं। दूर-दराज रहने वाले रिश्तेदारों या परिचितों को डिजिटल ही भेज रहे हैं। रोहतक में रेलवे रोड पर एक गली ही कार्ड वाली गली के नाम से जानी जाती है।