रोहतक। कोविड-19 संक्रमण काल में हर स्थिति से निपटने के लिए पीजीआईएमएस पूरी तरह तैयार है। यहां के नवनिर्मित मॉड्यूलर ओटी कांप्लेक्स को मरीजों का उपचार करने से पहले ड्राई रन की अनुमति दे दी गई है। इसके अलावा लंबे समय से चर्चाओं में रहा आईसीसीयू भी अब खाली हो जाएगा। यहां के मरीजों को वार्ड तीन में शिफ्ट किया जाएगा। ड्राइ रन के दौरान अधिकारी बताएंगे कि उन्हें मरीजों की संख्या बढ़ने पर व्यवस्था बनाने के लिए कितना स्टाफ चाहिए।
कुलपति डॉ. ओपी कालरा के निर्देशों पर हुई अधिकारियों की बैठक में अहम फैसले लिए गए हैं। इसमें सबसे पहले मेडिसिन के अंडर में चल रहे आईसीसीयू को खाली किया जाएगा। यह मामला लंबे समय से अटका पड़ा था। यहां की हाई डेफिसियंसी यूनिट में अब हार्ट के मरीज नहीं होंगे। इसके अलावा 24, 25, 26 वार्ड को अगले दो माह के लिए कोविड के लिए रखा जाएगा। दिल वाले मरीजों को वार्ड तीन की हाई डेफिसियंसी यूनिट में शिफ्ट किया जाएगा। आईसीसीयू के मानीटर पहले की तरह लगे रहेंगे। यहां दो वेंटीलेटर सेंट्रल स्टोर से लेकर और लगाए गए हैं। इसके अलावा बैठक में तय हुआ कि डे केयर पहले की तरह प्रधान नोडल अधिकारी कोविड 19 डॉ. ध्रुव चौधरी के अंडर काम करेगा।
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ड्राइ रन में देखी जाएगी जरूरत
अधिकारी देखेंगे कि कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ने पर यदि मॉड्यूलर ओटी को चलाया जाता है तो यहां कैसे काम होगा और कितना स्टाफ इसके लिए अतिरिक्त चाहिए। इसमें नर्सिंग, पेरा मेडिकल स्टाफ, बीयरर, स्वीपर की ड्यूटी लगाई जाएगी। ड्राइ रन के दौरान देखा जाएगा कि कितना स्टाफ और यहां चाहिए। इस पूरी प्रक्रिया पर एनेस्थीसिया विभाग की हेड नजर रखेंगी। विभिन्न विभाग उन्हें अपनी जरूरत भेजेंगे।
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एनेस्थीसिया चलाएगा सिस्टम
मॉड्यूलर ओटी कांप्लेक्स एनेस्थीसिया एचओडी के नेतृत्व में काम करेगा। यहां दस रेजिडेंट डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाएगी। इसमें 50 प्रतिशत डॉक्टर एनेस्थीसिया, 20 मेडिसन व बाकी 30 अलग सुपर व सुपरस्पेशयलिटि विभाग के डॉक्टर होंगे। इसमें विभिन्न विभागों के एचओडी व एनेस्थीसिया विभाग के एचओडी रोटेशन में डॉक्टरों की ड्यूटी का रोस्टर तैयार करेंगे। अब मेडिसिन विभाग एनेस्थीसिया विभाग के अपने डॉक्टर भेजेगा। 30 प्रतिशत स्पेशल डॉक्टरों का रोस्टर एनेस्थीसिया विभाग व निदेशक मिल कर तय करेंगे।
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सड़कें व कोरिडोर होंगे दुरुस्त
मरीजों को आने जाने में समस्या न हो इसके लिए पीडब्ल्यूडी बीएंडआर विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वह सड़कें और कोरिडोर को सही करें। ताकि मरीजों के आने के समय कोई समस्या न हो। गौरतलब है कि प्रदेश में कोरोना की पीक आने की संभावना को देखते हुए अधिकारियों ने अपनी ग्राउंड स्तर पर तैयारी करनी शुरू कर दी हैं।