हर मिनट की देरी का जवाब मांगने वाला रेलवे अपने ही चालकों के भाईचारे से परेशान है। चालक दल अपने चहेतों को छूट चुकी गाड़ी में बैठाने के लिए स्पेशल हार्न बजाकर गाड़ी रोक देते हैं और कारण कारण इमरजेंसी चेन पुलिंग में दर्ज करा देते हैं। चालक जनरल बोगी में चेन पुलिंग होने का संदेश देते हैं, जिससे आरपीएफ आरोपी को खोजती ही रह जाए।
आरपीएफ के मुख्यालय की रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश मुख्य स्टेशनों पर प्रतिदिन के औसतन चार से पांच चेन पुलिंग के मामले अज्ञात पर ही दर्ज होते हैं। जरनल बोगी में यात्रियों की संख्या अधिक होती है, इसलिए पहचान भी नहीं हो पाती और नतीजा कोई हिरासत में नहीं लिया जाता है। जबकि कहने के लिए रेलवे अपने चालक और गार्ड से रेल गाड़ी की हर मिनट की रिपोर्ट लेता है।
गाड़ी किस फाटक पर रुकी, किस बत्ती पर ठहरी, सिग्नल कहां खराब था, चेन कहां खींची गई, स्टेशन से क्यों देरी से रिलीव किया गया आदि कई जानकारी गार्ड को अपने मुख्यालय देनी होती हैं। लेकिन भाईचारा निभाने के लिए इसका भी तोड़ निकाल लिया गया है, वह है गाड़ी रोको और इमरजेंसी चेन पुलिंग के तहत कार्रवाई कर दो।
ये हैं नियमयदि कोई ट्रेन सिग्नल मिलने के बाद भी रोकी गई है तो कारण देना होता है। जब ट्रेेन की चेन पुलिंग होती है तो चालक आरपीएफ को सूचना देने के लिए स्पेशल हार्न बजाता है, जिससे वे आरोपियों को हिरासत में ले लें। यदि चालक आरक्षित कोच की रिपोर्ट करते हैं तो आरपीएफ उसमें बैठने वाले यात्रियों तक आसानी से पहुंच सकती है। साथी के लिए ट्रेन रोकने की दशा में चालक जरनल कोच की रिपोर्ट करते हैं, ताकि चेन पुलिंग करने वाले तक आरपीएफ पहुंच ही न सके।
10 से 15 लीटर डीजल और कीमती समय होता है बर्बादडीजल रेल इंजन एक्सपर्ट की मानें तो एक बार गाड़ी छूटने के बाद यदि गाड़ी रोकी जाती है तो कम से कम दस से पंद्रह लीटर डीजल खराब जाता है। इसके साथ ही कम से कम पांच मिनट गाड़ी और देरी से चलती है। लंबे रूट के यात्रियों के लिए यह मुसीबत भरा होता है।
पल्ला झाड़ते अधिकारीट्रेन में चेन पुलिंग के बारे में कोई भी अधिकारी स्पष्ट बोलने को तैयार नहीं होता। जबकि सूत्रों की मानें तो यह रुटीन हो गया है। आरपीएफ भी सब कुछ जानते हुए अज्ञात पर मामला दर्ज कर इतिश्री कर लेता है।
जरनल बोगी में चेन खींचने वाले को तलाशना मुश्किलहम चालक और गार्ड की रिपोर्ट के आधार पर अज्ञात पर चेन पुलिंग का मामले दर्ज कर लेते हैं। हमारे जवान गाड़ी में होते हैं, स्पेशल अलार्म बजते ही वे अलर्ट हो जाते हैं। जब शिकायत जरनल बोगी की होती है तो उनको तलाशना मुश्किल हो जाता है। इस तरह के कई मामले फाइलों में दर्ज हैं।- एसपी सिंह, प्रभारी, जीआरपी।