रोहतक। कोरोना के खिलाफ लड़ाई में महिलाएं खुद की बजाय परिवार की सुरक्षा को महत्व दे रही हैं या राज्य महिला आयोग तक लॉकडाउन व पूरे परिवार की घर में मौजूदगी के चलते पहुंच नहीं पा रही हैं। राज्य महिला आयोग को मिली रही कम शिकायतों से तो यहीं प्रतीत हो रहा है। लॉकडाउन के पहले दो सप्ताह में आयोग के पास मात्र 95 शिकायतें पहुंची हैं। उनमें भी आधी से ज्यादा ऑनलाइन आयोग को भेजी गई हैं। जबकि बाकी डाक के माध्यम से मिली हैं।
राज्य महिला आयोग की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सुमन ने बताया कि चाहे लॉकडाउन के चलते दंपती अपने परिजनों व बच्चों के साथ घर में हैं। बावजूद इसके आयोग को लॉकडाउन से पहले की अपेक्षा कम शिकायतें मिल रही हैं। इसमें दहेज उत्पीड़न, मारपीट व छेड़छाड़ और दुष्कर्म के आरोप से संबंधित है। उन्होंने बताया कि 21 मार्च से पहले आयोग को पूरे प्रदेेेश से हर माह 300 से ज्यादा शिकायतें मिलती थी। इसमें खुद भी महिलाएं आकर देकर जाती थी। अब लॉकडाउन के चलते महिलाएं पंचकूला स्थित ऑफिस नहीं आ पा रही है। दूसरा आयोग की ईमेल या डाक से ही शिकायतें मिल रही हैं। अब तक 21 मार्च से 3 अप्रैल तक 95 के करीब शिकायतें मिली हैं। उनको संबंधित पुलिस थानों को ऑनलाइन ही भेजा जा रहा है। साथ में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी जा रही है। दूसरा, ऑफिस के अंदर परेशान करने या यौन उत्पीड़न की शिकायत नहीं आ रही हैं, क्योंकि सरकारी व गैर सरकारी कार्यालय बंद हैं।
आयोग ने माना इसके दोनों पहलू
: सर्वप्रथम कोरोना को लेकर पूरा देश अलर्ट हैं। परिवार की सुरक्षा के माता-पिता घरों में बच्चों के साथ हैं। ऐसे में खुद की बजाए महिलाएं अपने परिवार की ज्यादा सोच रही हैं।
: दूसरा, लॉकडाउन के चलते महिलाएं शिकायत नहीं कर पा रही हैं। शिक्षित व जागरूक महिलाओं को ही आयोग का ई-मेल व पता मालूम हैं।