रोहतक। कोरोना से बचाव का टीका ना लगवाने वाले फ्रंट लाइन हेल्थ वर्कर्स को स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों व पीजीआईएमएस प्रशासन की तरफ से निर्देश हैं कि यदि उन्हें वैक्सीन नहीं लगवानी तो वह लिखकर दें। वह वैक्सीन नहीं लगवाते तो अन्य जरूरतमंदों को यह वैक्सीन उपलब्ध कराई जा सके। क्योंकि हेल्थ वर्कर्स के रिस्क को देखते हुए उन्हें इस अभियान में प्राथमिकता दी गई है। बार-बार जागरूक करने के बाद भी पीजीआईएमएस के लाभार्थी आगे नहीं आ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने शनिवार को विडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पीजीआईएमएस प्रशासन से टीकाकरण कराने वालों का डाटा मांगा है। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि डॉक्टरों, नर्सों व स्टाफ को टीकाकरण के लिए प्राथमिकता इसलिए दी जा रही है कि वह सबसे अधिक खतरे में काम करते हैं। इनके जिम्मे संक्रमित मरीजों का उपचार करना है। वहीं पीजीआईएमएस के निदेशक डॉ. रोहतास कंवर यादव ने सभी विभागाध्यक्षों को पत्र लिख कर कहा है कि वह 31 जनवरी तक अपने-अपने विभाग में सभी का टीकाकरण करवाना तय करें। अभियान पूरा होने के बाद अन्य फ्रंटलाइन वर्कर्स को भी टीका लगाया जाना है। यदि अब हेल्थ वर्कर्स टीकाकरण नहीं कराते तो संक्रमण के लिए कौन जिम्मेदार होगा। अब तक कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीन नहीं थी, लेकिन अब सुविधा है। इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। सुश्रुत सभागार में टीकाकरण के लिए तीन प्वाइंट बनाए गए हैं। यहां 11 से 11:50 व 12:10 से एक बजे तक टीका लगाया जा रहा है। अधिकारी ने बताया कि टीकाकरण की तिथि को कुछ दिन के लिए बढ़ाया जा सकता है।
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200 का था लक्ष्य 96 को लगा टीका
स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार को कोविशील्ड वैक्सीन लगाने का 200 का लक्ष्य रखा था, जोकि 96 तक ही पहुंच पाया। बनियानी पीएचसी में 25 का लक्ष्य था जबकि यहां 27 को टीका लगाया गया। पीजीआईएमएस रोहतक में 100 को टीका लगाने का लक्ष्य था, जबकि टीका लगवाने 30 ही पहुंच पाए। इसके अलावा जिला अस्पताल में टीका लगाया गया।
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सैशन, टारगेट, अचीवमेंट व एईएफआई बताने में छूट रहे पसीने
स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारी रोजाना जिला स्तरीय अधिकारियों से टीकाकरण के सैशन, टारगेट, अचीवमेंट व एईएफआई टीका लगने के बाद साइड इफेक्ट के बारे में पूछते हैं। इसके लिए 12:30, 2:30, 4:30 व 5:30 का समय तय है। अधिकारियों को रोजाना टारगेट और अचीवमेंट बताने में समस्या हो रही है। क्योंकि विभाग पीजीआईएमएस का टारगेट पूरा नहीं कर पा रहा है।
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पंजीकृतों के हिसाब से हमारे पास पर्याप्त संख्या में वैक्सीन उपलब्ध हैं। लाभार्थी टीकाकरण सेंटर पर जा कर वैक्सीन लगवा सकते हैं। हेल्थ वर्कर्स के बाद अन्य फ्रंट लाइन वर्कर्स को वैक्सीन लगाई जानी है। इसलिए जरूरी है कि हेल्थ विभाग से जुड़े फ्रंट लाइन वर्कर्स स्वयं का समय पर टीकाकरण करवा लें।
- डॉ. अनिलजीत त्रेहान, जिला टीकाकरण अधिकारी
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कोविशील्ड वैक्सीन से कोई नुकसान नहीं है। यह कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए है। हेल्थ वर्कर्स सबसे अधिक रिस्क में काम करते हैं, इसलिए उन्हें टीकाकरण करवाना चाहिए। जब स्वयं सुरक्षित होंगे तभी मरीजों का सही उपचार कर पाएंगे। यदि किसी टीकाकरण सेंटर पर इंटरनेट नहीं चल रहा तो मैनुअल काम किया जा सकता है।
- डॉ. अनिल बिरला, सिविल सर्जन
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कोविड -19 टीकाकरण के बारे में अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
- आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 व भारतीय दंड संहिता 1860 के तहत होगी दंडात्मक कार्रवाई
कोविड-19 टीकाकरण के बारे में अफवाह फैलाने वालों की खैर नहीं। जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने का फैसला किया है। उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार ने कहा कि कोविड-19 की दोनों वैक्सीन को राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण द्वारा पूरी तरह सुरक्षित पाया गया है। इन वैक्सीन के खिलाफ अफवाहें फैलाने वालों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 एवं भारतीय दंड संहिता 1860 की संबंधित धाराओं के विरुद्घ दंडात्मक कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया एवं अन्य मीडिया में कोविड-19 की वैक्सीन की सुरक्षा एवं प्रभाव के बारे में भ्रामक अफवाहें फैलाई जा रही है। कोरोना पर नियंत्रण पाने के लिए सीरम संस्थान द्वारा कोविशील्ड तथा भारत बायोटेक लिमिटेड द्वारा कोवैक्सीन विकसित की गई है। कोरोना टीकाकरण हेतु राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह द्वारा लिये गये फैसले के अनुसार सर्वप्रथम स्वास्थ्य कर्मियों तथा फ्रंट लाइन वर्कर्स का टीकाकरण किया जा रहा है।