भाली निवासी नरेंद्र की हत्या के आरोपी मोहन, दीपक व जस्सु वारदात को अंजाम देने के बाद उसके परिजनों के साथ रहते थे। नरेंद्र को ढूंढने का नाटक करते थे और जगह-जगह जाते भी थे। पुलिस पूछताछ में उन्होंने इसका खुलासा किया है।
उन्होंने बताया कि परिजनों को उन पर शक न हो इसके लिए पंचायतों में भी शामिल हुए और कार्रवाई की मांग को लेकर पुलिस के पास भी परिजनोें के साथ गए। अभी तक तीसरे आरोपी जस्सु की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।
गांव भाली आनंदपुर निवासी नरेंद्र 24 फरवरी को दीपक से मिलने के लिए रोहतक आया था। रोहतक में दो-तीन जगह जाने के बाद नरेंद्र दीपक को छोड़ने के लिए सेक्टर 4 तक चला गया। वहां पर पहले से ही सुधीर ऊर्फ जस्सु खड़ा हुआ था। दीपक ने नरेंद्र से कुछ देर रुकने के लिए कहा।
उसके बाद दोनों ने सुनसान जगह देखकर नरेंद्र का गला दबा दिया। इससे उसकी मौत हो गई। उसके बाद वे नरेंद्र की शव को उसी की स्विफ्ट गाड़ी की डिग्गी में डालकर मोहन के घर ले गए। मोहन ने नरेंद्र के शव को खुर्द-बुर्द करने के लिए दीपक व जस्सु की ही जिम्मेवारी लगा दी।
इसके लिए उसने दोनों को एक जरीकन पैट्रोल उपलब्ध कराया और कहीं पर शव जला देने के लिए कहा। दीपक व जस्सु नरेंद्र के शव को लेकर रात लगभग 12 बजे गांव कोंट पहुंचे। वहां पर एक बिटोड़े में नरेंद्र के शव को दबा दिया गया और पैट्रोल छिड़क कर आग लगा दी।
नरेंद्र की हत्या इसलिए की गई थी क्योंकि उसने एक समझौते पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। एक झगड़े के मामले में मोहन ने आरोपियों से ढाई लाख रुपये में समझौता किया था, लेकिन नरेंद्र उस पर हस्ताक्षर नहीं कर रहा था। जिसके कारण मामला बिगड़ रहा था। मोहन ने नरेंद्र की हत्या करने की साजिश रची ताकि उसके हस्ताक्षर की जरूरत ही न रहे।