रोहतक। दादा लखमी चंद विश्वविद्यालय अपने विशालकाय भवन की वजह से प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में प्रसिद्ध है। आर्किटेक्ट राज रेवाल की पद्धति पर बनाया गया भवन विद्यार्थियों के साथ विरासत के रूप में भी गहरी छाप छोड़ रहा है। इंजीनियरों की टीम ने 22 एकड़ में धौलपुर स्टोन क्लैडिंग पद्धति से भवन को तैयार किया है।
सेक्टर-6 स्थित राजीव गांधी राज्यस्तरीय खेल स्टेडियम के पास देश-प्रदेश में नामित दादा लखमी चंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2014 में हुई थी। इसके विस्तार को लेकर अभी भी प्रस्ताव बनाए जाते हैं।
फिल्म, तकनीकी, टेलीविजन, दृश्य, डिजाइन व ललित कला के क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी के उद्देश्य से 22 एकड़ में शुरू किए गए विश्वविद्यालय के निर्माण पर 121 करोड़ रुपये की लागत आई है। हालांकि, पूरा क्षेत्र 36 एकड़ में फैला हुआ है।
इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों का कहना कि विश्वविद्यालय की प्रत्येक दीवार राजस्थान के धौलपुर क्षेत्र से प्राप्त बलुआ पत्थर से बनाई गई है। यह पत्थर लाल, बेज और गुलाबी रंगों का होता है। इसी धौलपुर स्टोन क्लैडिंग से भवन आकर्षक दिख रहा है।
वहीं, विश्वविद्यालय के गोलाकार सेंट्रल सभागार के शीर्ष पर सोलर पैनल लगाए गए हैं। आर्किटेक्ट व इंजीनियर्स ने इमारत को वातानुकूलित व इको फ्रेंडली बनाने के लिए सोलर पैनल सेट के लिए जगह बनाई है।
इमारत में अभी भी काफी जगहों पर सोलर पैनल सेट लगाए जा रहे हैं। पहले यह 200 किलोवाट का लगाया गया था मगर अब यह 500 किलोवाट का हो गया है।
विश्वविद्यालय में हैं चार विभाग
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क निदेशक डॉ. बेनुल तोमर ने बताया कि विश्वविद्यालय में डिजाइन, फिल्म एंड टेलीविजन, योजना एवं वास्तु कला व दृश्य कला संकायों में अलग-अलग पाठ्यक्रम करवाए जाते हैं। हमारा यह मानना है कॉरपोरेट की तर्ज पर बना यह सरकारी भवन प्रदेश में कहीं नहीं है। इन सभी विभागों में धौलपुर स्टोन क्लैडिंग का ध्यान रखा गया है। उन्होंने बताया कि यहां पढ़ाई के लिए उत्तर ही नहीं दक्षिण भारत तक के विद्यार्थी आते हैं।
क्या होती है स्टोन क्लैडिंग पद्धति
इस पद्धति के तहत किसी दीवार की बाहरी परत पर पतले पत्थरों की एक परत चढ़ाई जाती है। इससे यह आभास होता है कि दीवार पूरी तरह से पत्थर से तैयार की गई है। यह देखने में ऐसी लगती है कि पूरी दीवार पत्थर की हो।
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विश्व-प्रसिद्ध वास्तुकार राज रेवाल ने विश्वविद्यालय को डिजाइन किया है। अपनी अनूठी सुंदरता और भव्य संरचनाओं के लिए विश्वविद्यालय विशेष पहचान रखता है। उनकी पद्धति पर ही इंजीनियर्स की ओर से विशाल सेमिनार हॉल, उन्नत प्रयोगशालाएं, कार्यशालाएं व अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित स्टूडियो से लेकर सभागार बनाए गए हैं। –डॉ. बेनुल तोमर, निदेशक, जनसंपर्क, डीएलसी सुपवा।