बहादुरगढ़। दिवाली पर्व 31 अक्तूबर वीरवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। अमावस्या तिथि वीरवार को दोपहर 3 बजकर 52 मिनट से शुरू होगी और समापन 1 नवंबर को 5 बजकर 23 मिनट पर होगा। इस समय लक्ष्मी पूजन किया जाएगा।
लालचंद कॉलोनी निवासी ज्योतिषाचार्य रमेश भगत ने बताया कि दीपों का त्योहार दिवाली 31 अक्तूबर को है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की उपासना करने से घर में धन दौलत की बरसात होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या वापस लौटे थे और नगरवासियों ने इस खुशी में दीप प्रज्ज्वलित किए थे। तभी से दिवाली मनाने की परंपरा शुरू हुई है। वहीं हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को दिवाली का त्योहार मनाया जाता है। 1 नवंबर को अमावस्या सुबह सवा छह बजे तक ही है, इसलिए इसके बाद लक्ष्मी पूजन नहीं किया जा सकता। इस कारण दिवाली 31 अक्टूबर को मनाना शुभ है।
वहीं शहर के मजीद मोहल्ला निवासी ज्योतिषाचार्य प्रवीण शास्त्री का कहना है कि दिवाली कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को ही मनाई जाती है। इस साल 31 अक्तूबर को दिन में 3 बजकर 52 मिनट से अमावस्या लग रही है, जो 1 नवंबर को शाम 5 बजकर 23 मिनट तक रहेगी। व्रत या त्योहार में उदया तिथि देखी जाती है, लेकिन दिवाली के त्योहार में प्रदोष काल पर विचार किया जाता है। दिवाली के दिन सूर्यास्त के बाद दीपक जलाने का विधान है। 1 नवंबर को अमावस्या तिथि शाम के समय ही समाप्त हो जाएगी, इसके कारण प्रदोष काल प्राप्त नहीं होगा। इस वजह से 31 अक्तूबर को दिवाली का पर्व मनाना बेहतर रहेगा। वहीं, गोवर्धन पूजा में उदया तिथि का मान होता है। ऐसे में गोवर्धन पूजा 2 नवंबर और भाई दूज 3 नवंबर को मनाया जाएगा। इस तरह इस बार दीपोत्सव छह दिनों तक चलेगा।