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Rohtak News: रावण ग्राउंड में राजकीय महाविद्यालय के निर्माण पर विवाद, आपत्ति जताई

Tue, 14 Jul 2026 02:44 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
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कार्यक्रम में मौजूद भाजपाई कार्यकर्ता व प्रदेश सचिव रेणु डाबला। स्त्रोत स्वयं
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कलानौर। नगर पालिका कलानौर की सोमवार को हुई बैठक में राजकीय महाविद्यालय के निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया। 10 पार्षदों और चेयरपर्सन निर्मला देवी ने रावण ग्राउंड पर महाविद्यालय बनाने के प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके विपरीत, छह पार्षदों ने प्रस्तावित स्थान पर आपत्ति दर्ज कराते हुए इसका विरोध किया।
विरोधी पार्षदों का कहना है कि चिह्नित स्थान पर वर्षों पुरानी श्मशान भूमि और दशकों से धार्मिक आयोजनों का केंद्र रावण ग्राउंड मौजूद है। साथ ही, करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित स्टेडियम भी वहीं है। इसलिए इस स्थान पर महाविद्यालय बनाना उचित नहीं होगा।
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पार्षदों की आपत्ति
पार्षद रामबीर, हरप्रीत सिंह जुनेजा, प्रियंका पुनियानी, सन्नी उर्फ सानिया और मनजीत सिंह सिक्का ने कहा कि यह केवल जमीन का मामला नहीं है। यह हजारों लोगों की आस्था और वर्षों पुरानी परंपराओं से जुड़ा विषय है। उन्होंने सरकार से अन्य उपयुक्त भूमि का चयन करने का आग्रह किया। इससे धार्मिक, सामाजिक और सार्वजनिक महत्व वाले इस स्थल की पहचान प्रभावित नहीं होगी। पार्षद प्रवीण ने पानी के टैंकरों के इस्तेमाल और कर्मचारी की ड्यूटी तय करने की मांग की। पार्षदों ने लंबे समय से टेंडर जारी न होने पर भी नाराजगी जताई।
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जमीन पर ट्रस्ट का दावा
महाविद्यालय के लिए प्रस्तावित जमीन पर सत जिंदा कल्याणा धर्मार्थ ट्रस्ट अपना दावा जता रहा है। ट्रस्ट के अनुसार, वर्ष 1976 में यह भूमि दशहरा और अन्य धार्मिक आयोजनों के लिए नगरपालिका के प्रस्ताव के तहत ट्रस्ट को दी गई थी। तब से यहां लगातार धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं। मोनिका आनंद, वाइस चेयरपर्सन, नगर पालिका कलानौर, ने कहा कि नगरपालिका की 10 एकड़ भूमि कॉलेज मोड़ पर है जिस पर विचार किया जाना चाहिए। अशोक कुमार, प्रधान, श्मशान भूमि संस्था कलानौर, ने बताया कि दो एकड़ भूमि श्मशान घाट की है और राजस्व रिकार्ड में भी दर्ज है। नगर पालिका कलानौर के सचिव विनय कुमा ने कहा कि चिह्नित भूमि की जांच की जाएगी और रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी।
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हमारी संस्था चाहती है कि क्षेत्र की बेटियों व अन्य बच्चों की पढ़ाई की बेहतर व्यवस्था हो। गुरु परंपरा करीब पांच दशक से इस दिशा में कार्यरत है। कोई भी कार्य विवाद की पृष्ठभूमि के साथ प्रारंभ न किया जाए।
- महंत खुशहाल दास, सत जींदा कल्याणा ट्रस्ट।
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