कृषि विभाग पिछले कई सालों से किसानों की मिन्नतें करता आ रहा है कि धान की सीधी बिजाई करें, इसमें पानी की बचत होती है। लेकिन किसान कभी नहीं माने। इस बार मजदूरों की ऐसी किल्लत हुई कि धान की सीधी बिजाई काफी बढ़ गई है। इस साल इसके सारे रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद है।
सामान्य तरीके से धान की पौध तैयार करने के बाद उसे खेत में ट्रांसप्लांट कर पूरी तरह पानी भर दिया जाता है। इसमें रोपाई आदि का काम मजदूर ही करते हैं। इसमें ढाई से तीन हजार रुपये प्रति एकड़ खर्च आता है। इसके अलावा पानी की खपत बहुत ज्यादा होती है। जबकि, सीधी बिजाई गेहूं की तरह ही मशीन से की जाती है, जोकि ट्रैक्टर के साथ की जाती है। आमतौर पर मशीन का किराया 800 रुपये प्रति एकड़ लगता है। इस विधि से पानी करीब तीस प्रतिशत कम लगता है। गिरते भूजल स्तर को देखते हुए पिछले कई सालों से कृषि विभाग किसानों को धान की सीधी बिजाई के लिए प्रेरित करता आ रहा है। लेकिन किसानों ने कभी नहीं सुनी। पिछले साल जिले भर में धान की सीधी बिजाई सिर्फ 250 एकड़ में हुई थी। जबकि, जिले में धान का कुल रकबा करीब 1.07 लाख एकड़ है। लेकिन इस बार मजदूरों की किल्लत हो गई। प्रवासी मजदूर कोरोना संकट के दौरान लगाए गए लॉकडाउन में अपने घर चले गए। बिहार आदि राज्यों से काफी मजदूर गेहूं और सरसों की कटाई के लिए आए थे। श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन शुरू हुईं तो वे भी चले गए। मजदूरों की किल्लत ने किसानों को धान की सीधी बिजाई की तरफ मोड़ा। कृषि विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक जिले के 6200 एकड़ रकबे में धान की सीधी बिजाई हो चुकी है। इसके रिकॉर्ड 10 हजार एकड़ पार करने की उम्मीद है। धान की परंपरागत रोपाई 15 जून से शुरू होनी है। इस तरह लगभग 10 फीसदी रकबा धान की सीधी बिजाई में आ जाएगा, जिससे काफी पानी बचने की उम्मीद है।
किसान की रोपाई को देते है तरजीह
किसान परंपरागत तरीके से धान की रोपाई को ही तरजीह देते हैं। सीधी बिजाई की तकनीक काफी पहले से थी, लेकिन ज्यादातर किसानों ने इसे नहीं अपनाया। परंपरा के साथ-साथ इस तकनीक में फसल की देखभाल ज्यादा करनी पड़ती है। रोपाई में तो पूरा खेत पानी से भर दिया जाता है, उसके बाद ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन इसमें बिजाई के बाद खरपतवार लगने का खतरा काफी होता है। सांवक व बरटा के अतिरिक्त अन्य घास जाति के खरपतवारों लैप्टोक्लोवा, इरेग्रेस्टिस, मकड़ा, डिल्ला की समस्या हो सकती है। इसी लिए कृषि विशेषज्ञ सीधी बिजाई के तुरंत बाद कीटनाशकों का स्प्रे करने की सिफारिश करते हैं। इससे खरपतवारों पर 90 फीसदी नियंत्रण किया जा सकता है। बिजाई के 25 दिन बाद निराई, गोड़ाई करने के बाद भी स्प्रे किया जा सकता है।
ऐसे होती है सीधी बिजाई
धान की सीधी बिजाई के लिए मध्यम संरचना वाली भूमि सबसे ज्यादा उपयुक्त है। सबसे पहले खेत को समतल करना आवश्यक है। बिजाई के लिए उल्टे टी प्रकार के फाले व तिरछी प्लेट युक्त बीज बक्से वाली बीज व उर्वरक जीरो ट्रिल ड्रिल का प्रयोग करना चाहिए। बत्तर खेत में ड्रिल से बिजाई के बाद देरी से पहली सिंचाई की जाती है। जबकि, सूखे खेत में ड्रिल से बिजाई के तुरंत बाद सिंचाई की जाती है। बिजाई के लिए जून का दूसरा व तीसरा सप्ताह उपयुक्त होता है।
इस बार मजदूरों के संकट के चलते धान की सीधी बिजाई का रकबा काफी बढ़ गया है। पिछले साल यह सिर्फ 250 एकड़ था, इस साल अब तक 6200 एकड़ में सीधी बिजाई हो चुकी है। इसके 10 हजार एकड़ से भी ज्यादा जाने की उम्मीद है।
डॉ. रोहताश सिंह, डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर, रोहतक।