रोहतक। सांपला में 53 हजार से अधिक बिजली कनेक्शन होने के बावजूद भी उपमंडल दो भागों में नहीं बट पाया है। उपमंडल के सब ऑफिसों में भी एक उपमंडल बनाने के जितने बिजली कनेक्शन हैं। एक ही उपमंडल के अधीन 50 हजार कनेक्शन होने से कार्यालय व्यवस्थाएं और उपभोक्ताओं को समय पर मिलने वाली सुविधाएं प्रभावित हैं।
सांपला उपमंडल में कुल 53,205 बिजली कनेक्शन हैं। सरकार की हिदायत के अनुसार 25 हजार कनेक्शनों पर एक उपमंडल बनाया जाता है। बिजली निगम के अनुसार सांपला उपमंडल में नियम के अनुसार दोगुना कनेक्शन है जबकि अकेले जसिया में 17,387 और भालौठ उपमंडल में कुल 25,621 कनेक्शन है।
ऐसे में सांपला उपमंडल को दो हिस्सों में गठित करने की प्रक्रिया बिल्कुल धीमा है जिससे एक उपमंडल के कर्मचारियों को दो उपमंडलों के अनुमान कार्य देखने पड़ रहा है और आमजन की सुविधा में 30 मिनट में होने वाला कार्य 1 से 2 घंटे देरी तक हो रहा है।
हालांकि, सांपला उपमंडल के दो सब ऑफिस बनाए गए हैं। इनमें छारा सब ऑफिस में 8,247 और हसनगढ़ ऑफिस में 15,358 बिजली कनेक्शन हैं। सांपाला में 53,205 बिजली के कनेक्शनों की देखरेख एक उपमंडल के भरोसे है।
नए उपमंडल के लिए अलग व्यवस्थाएं, अधिकारी व उपमंडल का कोड तक जारी किया जाना होता है। नए उपमंडल के लिए खुद का आरएपीडीआरपी सिस्टम होना आवश्यक है जो अभी तक सिरे नहीं चढ़ पाया है। बिजली निगम के अधिकारियों ने दावा कि सांपला उपमंडल को दो भागों में बांटने की प्रक्रिया जारी है। भैंसरू गांव के प्रदीप ने बताया कि एक ही कार्यालय होने से आमजन की शिकायतों का हल समय पर नहीं होता है। कार्यालय में कई बार तो भीड़ रहती है। इससे अधिक समय लगता है।
वर्जन
मुख्यालय की ओर कनेक्शन के आधार पर सांपला का दूसरा उपमंडल बनाने की स्वीकृति मिल चुकी है। दूसरे उपमंडल के लिए अभी स्टाफ और भवन नहीं मिला है। - जोगिंद्र सिंह मोर, एसडीओ, सांपला डिवीजन।