वॉर्ड में रखे जाएंगे पांच मरीज
विभाग में थेरेपी वाले मरीजों को रखने के लिए पांच वॉर्ड बनाए गए हैं। इनमें पांच ही मरीज रखे जाएंगे। इसकी वजह रेडियोएक्टिव किरणें हैं। थेरेपी देने के बाद मरीज को रेडियोएक्टिव का असर नियमानुसार कम होने तक मरीज को रखा जाएगा। न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष की जिम्मेदारी डॉ. रोहित को दी गई है। इनमें पास मां वैष्णो देवी धाम के पास सबसे ऊंची जगह न्यूक्लियर थेरेपी के लिए विभाग शुरू करने के अलावा हिमाचल में भी यह विभाग चलाने का अनुभव है। इससे मरीजों को राहत मिलेगी।
एईआरबी से ली गई है मंजूरी
न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग शुरू करने के लिए नियमानुसार एटॉमिक एनर्जी रेगुलेशन बोर्ड (एईआरबी) से स्वीकृति ली गई है। बोर्ड के निर्देशों के तहत ही यह भवन बनाया गया है। इसमें रेडियो एक्टिव पदार्थ रखने के लिए विशेष बंकर बनाया गया है। इसमें किसी के भी प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। मरीज के लिए अलग व्यवस्था बनाई गई है। यहां से मरीज को उसके शरीर से रेडियोएक्टिव का असर कम होने पर ही छुट्टी दी जाएगी। मरीज के मल का भी बोर्ड के नियमों के अनुसार निष्पादन किया जाएगा।
-डॉ. रोहित, प्रभारी, न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग, पीजीआई।
संस्थान में कैंसर रोगियों को बेहतर इलाज दिया जा रहा है। अब नई तकनीक से उन्नत व सटीक इलाज भी उपलब्ध होगा। इसके लिए न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग बनाया गया है। इसके लिए जरूरी उपकरणों की मांग की गई है। उपकरण आते ही इलाज शुरू कर दिया जाएगा।
-डॉ. एसके सिंघल, निदेशक, पीजीआई।
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