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नहीं चेते तो जान का दुश्मन बन जाएगा डेंगू का डंक

Sun, 06 Sep 2015 03:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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यदि हम अब भी नहीं चेते तो जान का दुश्मन बनने को तैयार है डेंगू का डंक।
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पूरा जिला डेंगू की जद में है, मरीजों की संख्या दिन दूनी और रात चौगुनी बढ़ रही है।

इतनी तेजी से बढ़ रहे डेंगू के कदम रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग भी मोर्चा संभालने में नाकाम है।

पीजीआई और सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था से अधिकांश मरीज असंतुष्ट हैं। थक-हारकर वे निजी अस्पतालों में उपचार करवाने को विवश हैं। स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड के अनुसार अभी तक 11 मरीजों को डेंगू की पुष्टि हुई है, जबकि निजी अस्पताल में उपचाराधीन मरीजों की संख्या देखें तो स्थिति भयंकर है।
कुछ दिनों पहले ही प्रेम नगर निवासी एक महिला की बुखार में मौत हो गई। हालांकि स्वास्थ्य विभाग उसके डेंगू पीड़ित होने की पुष्टि नहीं कर रहा है। इसी महिला के परिवार से एक कांग्रेस नेत्री की जांच के बाद उसके डेंगू पीड़ित होने की पुष्टि हुई। इसकी खबर स्वास्थ्य विभाग के पास इस कारण नहीं पहुंची क्योंकि उन्होंने जांच सरकारी अस्पताल में नहीं कराई। डेंगू पीड़ित मरीजों की सही संख्या का अनुमान इसलिए भी नहीं लग पा रहा क्योंकि निजी अस्पताल मनमानी पर उतारू हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सभी निजी अस्पतालों को डेंगू के मरीजों की सूचना देने के आदेश जारी कर दिए हैं, लेकिन इस आदेशों पर अमल न के बराबर हुआ। न निजी अस्पतालों से आंकड़े आए और न ही स्वास्थ्य विभाग का कोई दल निरीक्षण करने पहुंचा। एक के बाद एक मरीजों की पुष्टि होने के बाद भी पीजीआई और सामान्य अस्पताल में न तो डेंगू के मरीजों के लिए अलग से वार्ड की व्यवस्था की गई है और न ही मच्छरदानी की। वेंटिलेटर की अलग से व्यवस्था करना तो दूर की बात है।
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डेंगू के मरीजों की स्थिति
वर्ष         मरीजों की संख्या
2015             11
2014             01
2013             55    
2012             14

सुरक्षा की भी खास व्यवस्था नहीं
डेंगू के मच्छर को पनपने से रोकने के लिए मलेरिया विभाग की एंटी लार्वा टीम की व्यवस्था भी खासी नहीं है। इनके पास लाखों की आबादी के लिए महज चार फोगिंग गन हैं, जो कि दो वाहनों पर घूमती हैं। इतनी ज्यादा आबादी में डेंगू फैलने से रोकना चार मशीनों और सीमित स्टॉफ के बूते की बात नहीं है। वहीं, स्प्रे कराना स्वास्थ्य विभाग के बजट से बाहर है। यही नहीं, सेहत विभाग के पास इतना भी बजट नहीं है कि वह लोगों को जागरूक करने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर बैनर लगा सके या पैम्फलेट बांट सके।
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बोले अधिकारी
डेंगू के मरीजों की सूचना मिलते ही हम पूरे इलाके में फोगिंग करवाते हैं। आसपास के लोगों की जांच कराई जाती है। अभी तक 11 मरीजों की पुष्टि हुई है। निजी अस्पतालों में डेंगू जांच करने की उपयुक्त किट नहीं है। मरीजों को सरकारी अस्पताल में जांच अवश्य करानी चाहिए, वे उपचार भले ही निजी अस्पताल में करवाएं।
- डॉ. शिवकुमार, सिविल सर्जन।
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