संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। जिले के लोग केवल दुधारू पशुओं की सेहत पर भी अच्छा खासा ध्यान दे रहे हैं। सर्दी बढ़ने के साथ ही खल-बिनौला कारोबार में बढ़ोतरी हो गई है। पशुपालक पशुओं को रोजाना 20 टन तक खल-बिनौला खिला रहे हैं।
कारोबारियों का कहना है कि जिला में 200 से अधिक व्यापारी खल-बिनौला का कारोबार करते हैं। अनुमान है कि सीजन में प्रत्येक महीने 20 करोड़ से अधिक का कारोबार किया जा रहा है। वहीं, पशुपालकों का मानना है कि खल-बिनौला से गाय-भैंस के दूध की गुणवत्ता में न केवल वृद्धि होती है बल्कि मात्रा भी बढ़ती है।
कारोबारी संदीप कुमार गर्ग ने बताया बाजार में हरियाणा और पंजाब के अलावा महाराष्ट्र व तमिलनाडु से भी खल-बिनौला की आवक होती है। बेहतर गुणवत्ता के चलते चिलकी बिनौला को ग्राहक अधिक पसंद कर रहे हैं। जिले में दो लाख से भी अधिक गाय-भैंस हैं जिनमें से ज्यादातर दुधारू हैं।
दुधारू पशुओं के लिए वर्षों से खल-बिनौला खिला रहे हैं। इसके खिलाने से दूध गाढ़ा होता है। सर्दी में दूध की मात्रा और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए खल-बिनौला बेहतर होता है।
- अमित कुमार, पशुपालक, गांव सुंडाना
अक्तूबर से दिसंबर तक गाय-भैंस के ब्यांत का सीजन होता है। ऐसे में पशुओं का दूध बढ़ाने के लिए पशुपालक उन्हें खल-बिनौला व चूरी आदि खिलाते हैं। इसे दुधारू पशुओं को सर्दी में ताकत मिलती है और दूध की गुणवत्ता व मात्रा बढ़ती है।
- डाॅ. दीपक सैनी, पशु चिकित्सक