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सड़क दुर्घटना में घायल होकर आया दिल्ली पुलिस का जवान मिला कोरोना पॉजिटिव

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आपात स्थिति में आने वाले मरीजों के बारे में तय कर पाना मुश्किल भरा हो रहा है कि वह कोरोना का मरीज है या नहीं। इसी चक्कर में पीजीआई के तकरीबन 17 डॉक्टर सहित स्टाफ नर्स व ओटीए को होम क्वारंटीन होना पड़ेगा। इस टीम ने दिल्ली पुलिस के एक जवान का उपचार तो कर दिया, लेकिन एक दिन बाद पता चला कि वह मरीज कोरोना का पॉजिटिव है।
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23 मई की मध्य रात्रि के बाद आपात विभाग में रेवाड़ी से एक व्यक्ति अज्ञात के रूप में आया। चोट लगी होने के कारण वह अचेत था। डॉक्टरों ने उसकी टूटी हड्डी को जोड़ा और उसे रक्त की यूनिट चढ़ाई। इस दौरान ऑर्थो, सर्जरी, एनेेस्थिसिया विभाग के डॉक्टरों के अलावा इंटर्न डॉक्टर, स्टाफ नर्स और ओटीए भी शामिल रहे। उपचार के बाद जब मरीज को होश आया तो उसने बताया कि वह रेवाड़ी का रहना वाला है और दिल्ली पुलिस में है। उसे दिल्ली ही भेज दिया जाए। मरीज को एम्स दिल्ली भेज दिया गया। बताया जा रहा है कि दिल्ली एम्स में संस्थान से गए एक डॉक्टर को पता चला कि मरीज कोरोना पॉजिटिव है, तो उसने इसकी सूचना रोहतक पीजीआईएमएस को दे दी। इसके बाद संस्थान में हड़कंप मच गया। अब मरीज के संपर्क में आए लोगों को होम क्वारंटीन किया जा रहा है और उन लोगों को तलाशा जा रहा है, जो उनके संपर्क में आए हैं।
कम्यूनिटी मेडिसिन की टीम करेगी तय कौन होगा क्वारंटीन
कोरोना संक्रमित मरीज का उपचार व उसके संपर्क में आने वाले लोगों की लिस्ट बनाने की जिम्मेदारी कम्यूनिटी मेडिसिन के डॉक्टरों की टीम को दी गई है। इस टीम के निर्णय के आधार पर डॉक्टरों व स्टाफ को होम क्वारंटीन किया जाएगा। गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली का एक मरीज फेफड़े का पानी निकलवा गया तो एक अन्य मरीज अपनी एंडोस्कोपी करवा गया। मरीज के जाने के बाद पता चला कि वह कोरोना पाजिटिव थे। ये सभी डॉक्टर क्वारंटीन हैं।
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आपात विभाग में मरीज जब आता है तो उसका उपचार करना ही डॉक्टर की प्राथमिकता होती है। ऐसे में हम मरीज की जांच रिपोर्ट का इंतजार नहीं कर सकते। इस केस में कौन-कौन मरीज के संपर्क मे ंरहा है, उसको तय कर क्वारंटीन किया जाएगा। फिलहाल घबराने वाले बात नहीं है, क्योंकि संक्रमण फैलने में पांच से सात दिन लगते हैं। इसी समय अवधि में जांच भी कराई जाएगी।
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डॉ. वरुण अरोड़ा, जनसंपर्क अधिकारी, पीजीआईएमएस।
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