कृषि कानून रद्द कराने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों ने चार कार्यक्रम घोषित किए हैं। 28 फरवरी को संयुक्त मोर्चा की दोबारा से बैठक बुलाई गई है। आंदोलन को अभी एक सप्ताह सामान्य तरीके से चलाया जाएगा। 28 फरवरी की बैठक में बड़े आंदोलन का फैसला लिया जाएगा।
कुंडली बॉर्डर पर रविवार को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक हुई, जिसमें रणनीति तय की गई कि आंदोलन को आगे किस तरह से बढ़ाया जाए। किसान नेता कामरेड इंद्रजीत, रजमान चौधरी, प्रेम सिंह भंगु, योगेंद्र यादव, डॉ. आशीष मित्तल, जोगेंद्र नैन, डॉ. अशोक, हरेंद्र लखोवाल ने बताया कि फिलहाल चार नए कार्यक्रम तय किए गए हैं।
किसान नेताओं ने कहा कि 23 फरवरी को शहीद भगत सिंह के चाचा अजीत सिंह की पुण्यतिथि पर पगड़ी संभाल दिवस मनाया जाएगा। इसमें हर राज्य का किसान अपने यहां की वैधानिक पगड़ी पहनकर आएगा। 24 फरवरी को किसान दमन विरोधी दिवस मनाया जाएगा। यह दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ होगा।
इसमें देशभर में जिला, तहसील और ब्लॉक स्तर पर किसान प्रदर्शन करके राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देंगे। उन्होंने कहा कि जिस तरह से अपहरण होता है, ऐसे गिरफ्तारी हो रही है। इस दिन इसका भी विरोध किया जाएगा। नेताओं ने कहा कि किसान सरकार से मांग करेंगे कि जेल में बंद लोगों को रिहा किया जाए, केस रद्द किए जाए, नोटिस बंद किए जाएं और बॉर्डर से घेराबंदी भी हटाई जाए।
युवाओं के हाथ में होगी 26 की कमान
पहले महिला दिवस मना चुके किसानों ने इस बार 26 फरवरी को युवा दिवस मनाने का आह्वान किया है। इस दिन पूरे आंदोलन की कमान युवाओं के हाथ में होगी। किसान नेताओं ने कहा कि दीप सिद्धू और लक्खा सिधाना से पहले भी संयुक्त किसान मोर्चा का कोई मतलब नहीं था और आगे भी नहीं होगा। संयुक्त मोर्चा और किसान संगठनों के नियमों को मानने वाले युवाओं को मंच सांझा करने का अवसर दिया जाएगा।
इसमें किसी राजनैतिक दल के लिए कोई स्थान नहीं है। किसानों ने इसके बाद 27 फरवरी को गुरु रविदास जयंती और चंद्रशेखर आजाद के शहीदी दिवस पर मजदूर-किसान एकता दिवस मनाने का निर्णय लिया है। इस दिन किसानों का आह्वान होगा कि वह मोर्चों पर वापस लौटें और मजबूती प्रदान करें। उन्होंने कहा कि मोर्चा की बैठक में सख्ती से इस बात पर चर्चा की गई है कि कोई भी आंदोलन को बदनाम करने की साजिश करता है तो उससे सख्त ढंग से निपटा जाएगा।
28 को तीसरा चरण, बड़ा आंदोलन की घोषणा होगी
किसान नेताओं ने कहा कि 28 फरवरी से आंदोलन के तीसरे चरण का आगाज किया जाएगा। इस दिन बैठक के बाद बड़े आंदोलन की रणनीति का एलान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मार्च में संसद सत्र और कटाई को देखते हुए किसान आंदोलन को बड़े पैमाने पर करने का मन बना चुके हैं। नेताओं ने कह कि पंजाब व हरियाणा में महापंचायत का कोई मतलब नहीं है।
संयुक्त मोर्चा इस तरह का आयोजन नहीं कर रहा है। अगर कोई अन्य संगठन बुलाता है तो वहां किसान नेता पहुंच रहे हैं। 28 को इसको लेकर भी दोबारा चर्चा होगी। वहीं सरकार से प्रस्ताव आने पर बातचीत का रास्ता खुला होने की बात कही। सरकार भ्रम निकाल दे कि किसान इंतजार करके वापस चला जाएगा, बल्कि वह हक लेकर वापस जाएगा। पंजाब के मुख्यमंत्री के बयान पर किसानों ने कहा कि कानून टालने से आंदोलन खत्म नहीं होगा, बल्कि कानून रद्द कराकर ही वापसी होगी।