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ऑपरेशन घर वापसी को दीपेंद्र ने दी हरी झंडी, त्याग का दांव चलेंगे कांग्रेस

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नगर निगम के सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर के चुनाव को भाजपा हाउस में बहुमत के दम पर जितना आसान समझ रही है, उतना आसान नहीं है। वीरवार को संविधान स्थल पर पहुंचे राज्यसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा से कांग्रेस पार्षद कदम सिंह अहलावत ने मुलाकात की। जहां निगम चुनाव पर चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि दीपेंद्र हुड्डा ने ऑपरेशन घर वापसी को हरी झंडी दे दी। अब कांग्रेस रणनीतिकार अपने पुराने कांग्रेसी पार्षद, जो अब भाजपा में हैं, उनको त्याग का फार्मूला समझाएंगे, ताकि भाजपा को उसी के अंदाज में मात दी जा सके।
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भाजपा की दो कमजोर कड़ी ढूंढी जा रही, तभी होगा बहुमत का जुगाड़
कांग्रेस रणनीतिकारों का मानना है कि हाउस में 22 में से कहने को ही भाजपा के खेमे में 20 पार्षद हैं। इनमें आधे से ज्यादा की राजनीति पहले कांग्रेस से ही जुड़ी रही है। भाजपा के चुनाव चिह्न पर तो मात्र आठ पार्षद जीतकर आए थे, जिसमें वार्ड नंबर 3 से तिलकराज चौहान, 6 से सुरेश किराड़, 13 से अशोक खुराना, 14 से राधेश्याम ढल, 16 से डिंपल जैन, 17 से राजू सहगल, 19 से मुक्ता नागपाल व 20 से पूनम किलोई शामिल हैं। बाकी वार्ड 1 से कृष्ण सहरावत, 2 से सुमन सैनी, 4 से धर्मेंद्र गुलिया, 5 से गीता, 7 से मनोज, 8 से सोनू, 9 से जयभगवान ठेकेेदार, 10 से राहुल देशवाल, 12 से मंजु हुड्डा, 18 से दीपिका नारा, 21 से अनिल व 22 से संतोष देवी बाद में भाजपाई बने हैं।
यूं फार्मूला : भाजपा जिनको कुर्सी न दे, उनको कांग्रेस कुर्सी तक पहुंचाएं
सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस रणनीतिकार एक खास योजना पर काम कर रहे हैं। इसमें सबसे पहले भाजपा को हराकर भाजपा में गए पार्षदों को एकजुट किया जा रहा है। उनको त्याग का महत्व समझाया जा रहा है कि वे कुर्सी तक अपने दम पर पहुंच नहीं सकते। अगर भाजपा के दो पार्षदों को तोड़ लेते हैं। उनको सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर बनाकर किंग मेकर की भूमिका में रहें। तभी भाजपा को मात दी जा सकती है। अब समय बताएगा, विपक्ष अपनी चाल में कामयाब होता है या भाजपा अपने कुनबे को एकजुट रख पाती है या नहीं।
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पूर्व मंत्री के इर्द-गिर्द घूम रही भाजपा की रणनीति
उधर, भाजपा सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर के लिए दो नाम तय नहीं कर पा रही है। इसके लिए पार्टी के शीर्ष नेताओं से लेकर स्थानीय स्तर पर मंथन चल रहा है। एक तरह से पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर की सहमति दो पार्षदों के चयन में सबसे अहम है। क्योंकि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गढ़ में भाजपा को भविष्य की राजनीति को भी देखकर चलना है। ऐसे में मेयर की तरह सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर का पूर्व मंत्री से तालमेल होना जरूरी है।
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