दीपावली की रात पोर्च में रखे एक घरेलू एलपीजी सिलेंडर के फटने से सेक्टर चार की हाउसिंग बोर्ड कालोनी हिल गई।
पूरा परिवार मौत के मुंह में जाने से बाल-बाल बच तो गया, लेकिन 5 लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं। घटना स्थल से 500 मीटर की दूरी तक भूकंप जैसी कंपन महसूस की गई और कई घरों तक आग की लपटें पहुंची।
दमकल विभाग ने मौके पर पहुंच कर जल रही कार, बाइक और घरेलू सामान की ओर बढ़ रही आग पर किसी तरह काबू पाया। घायलों को उपचार के लिए पीजीआई में दाखिल कराया।
गनीमत रही कि लीक हो रहे एक अन्य सिलेंडर को दमकल विभाग अपने साथ ले गया और उसने फटने से बचा लिया, अन्यथा आस पास खडे़ अन्य लोगों के साथ भी अनहोनी हो सकती थी। अर्बन इस्टेट थाना पुलिस का कहना है कि मामले में शिकायत मिली है, जांच की जाएगी।
हालांकि शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि आतिशबाजी के आंगन में गिर जाने से बाइक ने आग पकड़ ली और उसके बाद सिलेंडर तक लपटें पहुंच गई।
पीड़ित रामनंद दहिया, इंद्रावती, प्रवीण, ज्योति, दीपिका और लक्ष्य के जहन में घटनाक्रम का खौफनाक मंजर 24 घंटे बाद भी नहीं मिट रहा है। पूरा परिवार सिलेंडर के टुकड़ों, घर के दरवाजे व शीशे, जली मोटरसाइकिल, कार, साइकिल, पर्दे और दरकी दीवाराें की हालत देखकर समझ नहीं पा रहा है कि वे जिंदा कैसे बचे। घर के बाहरी और आंगन में रखा सिलेंडर क्यों फटा, किसी को पता नहीं है। लेकिन एक दम धमाके के बाद आग किसी सुनामी की लहरों की तरह घर के हर कमरे में शीशे तोड़ कर पहुंची और चीजों को जलाते हुए दूसरे रास्ते से निकल गई। रामानंद ने बताया कि शायद घर में ज्यादा से ज्यादा रोशनदान और जाल नहीं होते तो सब कुछ तबाह हो जाता। सिलेंडर के पास रखे कूलर, अनाज की टंकी, शीशे, साइकिल के परखच्चे उड़ गए। एक सीएनजी लगी कार, दो बाइक भी आग की भेंट चढ़ गए और अधिकांश जल गए। रामनंद ने बताया कि उनकी दिवार घड़ी चल रही थी, लेकिन अब यह दीपावली की रात 10:25 बजे धमाके के बाद से बंद पड़ी है। वहीं पड़ोसियों ने बताया कि रामानंद के घर से एकाएक काफी मात्रा में धुंआ निकाल रहा था, इससे पहले कि वे उनको सूचना दे पाते एक जोर दार धमका हुआ और सब कुछ कांपने लगा। घर के सारे शीशे टूट गए और आग की लपटों ने जो भी सामने आया जला दिया। सभी को आशंका है कि कोई आतिशबाजी रामानंद के घर में गिरी होगी और संभवत: सिलेंडर लीक होगा और आग लग गई। हालांकि परिवार के सदस्यों ने दावा किया कि उनका सिलेंडर इंडेन गैस का था, यदि लीक होता तो पता चल जाता। वहीं, दमकल विभाग के कर्मचारी अशोक ने बताया कि मौके पर पहुंचे हमारे कर्मचारियों को पास में रखा एक और सिलेंडर लीक मिला, जिसे वे उठाकर ले गए।
बोले पीड़ित
डेढ़ से दो मिनट धुआं निकला और अचानक जोर से धमाका हो गया। मेरे घर में आग की लपटे आईं और मैं जल गया। हाथ में छाले पड़ गए हैं। घर के बाहर अमरूद का पेड़ तक झुलस गया है
- नरेश कुमार।
पूरा हाथ और चेहरा जल गया है। पता ही नहीं चला कि हुआ क्या है, अचानक आग की लपटें कहां से आई। घटनास्थल पर पुलिस काफी देर से पहुंची। दमकल वालों ने पीजीआई पहुंचाया।
- संदीप।
आग से हाथ और पैर जल गया। एक दम जोर से हुए धमाके ने डरा दिया। दीपावली की आतिशबाजी की आवाज को इस धमाके ने काफी पीछे छोड़ दिया। अभी भी डर लगता है।
- अंकित।
पूरा चेहरा और हाथ जल गया है। बहुत पीड़ा हो रही है। पता नहीं एक दम क्या हुआ। आग की लपटें कहां से आई, बाद में पता चला कि सिलेंडर फटा है।
- विशाल।
घर में दरवाजा बंद करके सो रही थी। एक दम धमाका हुआ, रोशनदान का शीश टूटा आग की लपटें कमरे में आई, पर्दे और मुझे जलाते हुए तेजी से खुले रोशनदान से बाहर की ओर चली गईं।
- इंद्रावती।
मेरा घर घटनास्थल से करीब 500 मीटर की दूरी पर है। लेकिन एक दम हुए धमाके ने सभी को हिला कर रख दिया। मौके पर जा कर देखा तो सब कुछ जल रहा था। सभी चिल्ला रहे थे।
- सुभाष नरवाल।
मेरा मकान 300 मीटर दूरी पर है। सब कुछ एक दम हिल गया। आग की लपटों ने गली के बाहर लगी लड़ियों को और लोगों को झुलसा दिया। गनीमत रही कि सिलेंडर अंदर नहीं रखा था।
- जगबीर कटारिया।
गली वालों की हालत देखकर सिलेंडर से डर लगने लगा है। हम अपने घर तो बचाव कर लें, लेकिन दूसरों के घर की लीकेज का क्या करें। धमाके की आवाज अभी तक कानों में गूंज रही है।
- मीनू ।
पुलिस और एंबुलेंस के प्रति जताई नाराजगी
स्थानीय लोगों ने देरी से पहुंची पुलिस और एंबुलेंस के प्रति नाराजगी जताई। सभी ने आरोप जड़ते हुए कहा कि फोन करने के 15 मिनट में दमकल विभाग की गाड़ी तो आ गई, लेकिन पुलिस और एंबुलेंस नहीं पहुंची। दमकल की दो गाड़ियों ने स्थिति पर काबू पाया। यहां तक कि घायलों को उन्होंने ही पीजीआई भी पहुंचाया।
24 अक्तूबर को लाए थे सिलेंडर
हादसे में जो सिलेंडर फटा है, वह इंडेन गैस का है। उपभोक्ता इसे शीला बाईपास स्थित गैस एजेंसी से 24 अक्तूबर को लाए थे। अब पीड़ित परिवार को मुआवजा मिलेगा या नहीं, यह निश्चित संबंधित बीमा कंपनी की नियमावली तय करेगी। गैस एजेंसी संचालक का दावा है कि हर उपभोक्ता की जान-माल का बीमा होता है, लेकिन उसकी नियम व शर्तें वे ही निर्धारित करते हैं।
बोले प्रबंधक
रात सवा 12 बजे दमकल विभाग द्वारा घटना की जानकारी मिली। मौके पर जा कर जांच की गई तो पता चला कि सिलेंडर पोर्च में रखा था। यहां दो सिलेंडर और साथ में बाइक खड़ी थी, जिस पर गेहूं की बोरी रखी गई थी। मौके का मुआयना करने पर पाया गया कि आतिशबाजी बोरी या मोटरसाइकिल की सीट पर गिरी होगी। उसके जलने से सीट गर्म हो गई और फिर बैटरी तक आंच पहुंची और वह फट गई। इससे पास रखे सिलेंडर की सीट गर्म हुई और उसमें वैपर (वाष्प) बनना शुरू हो गया। अधिक वैपर बनने पर यह बाहर नहीं निकला और एक दम भीतर के दबाव के चलते ब्लास्ट हो गया। इससे साथ रखा सिलेंडर भी पिचक गया था। सिलेंडर में बना वैपर जहां तक गया वहां तक सब कुछ झुलसा दिया। कुछ वैपर के क्लाउड घर के अंदर चले गए और नुकसान हो गया। सभी जाग रहे थे, इसलिए बड़ी घटना नहीं हुई। मौके पर ही दमकल के आने से आग को बढ़ने से रोक लिया गया। हम प्रयास करेंगे कि कंपनी की बीमा शाखा से उपभोक्ता को मुआवजा दिलवाया जाए। हर उपभोक्ता का बीमा होता है, बीमा कंपनी घटना के कारण देखती है।
- भूपेंद्र देशवाल, प्रबंधक, लक्ष्मी गैस एजेंसी।
गैस उपभोक्ता इस पर दें ध्यान
- सिलेंडर पर कैप लगी होनी चाहिए और खुली जगह में रखा हो।
- सिलेंडर स्टोर में न रखे, लाइट ऑन करने के साथ स्पार्किंग से आग लग सकती है।
- रात को रेगुलेटर जरूर बंद करें।
- सिलेंडर गैस चूल्हे से डेढ़ फुट ऊंचा रखा हो।
- लाइटर का प्रयोग न करके, माचिस का प्रयोग करें।