साल्हावास (झज्जर) । क्षेत्र के गांव बिरोहड़ में शुक्रवार को सोनीपत की खेवड़ा छावनी के सीआरपीएफ जवान अपने शहीद साथी जसवंत सिंह लखेरा की बेटी की शादी में कन्यादान करने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सबसे बड़ी बेटी ज्योति व छोटी बेटी मंजू की शादी में कन्यादान किया व अन्य रस्में निभाईं, ताकि बेटी को पिता की कमी महसूस न हो। इस दौरान मंजू का छोटा भाई सुखवीर भी इस दौरान भावुक नजर आया।
मंजू की शादी फरीदाबाद निवासी विशाल के साथ की गई है। ग्रामीणों को जैसे ही मंजू की शादी में सैन्य जवानों के आने की बात पता चली तो बड़ी संख्या में ग्रामीण भी कार्यक्रम में पहुंचे। ग्रामीणों की तरफ से सीआरपीएफ के जवानों का सम्मान किया गया। सैन्य जवानों ने परिजनों से मिलकर हाल चाल जाना और शादी की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
वीरांगना माया ने जब पंडाल में सीआरपीएफ जवानों को देखा तो वह भावुक हो गईं और रस्म अदा करने पहुंचे जवानों का धन्यवाद किया। शादी में शामिल होने के लिए परिवार की तरफ से सोनीपत स्थित सीआरपीएफ की खेवड़ा छावनी में शादी का निमंत्रण भेजा गया था। इस दौरान कोमल सिंह डीआईजीपी, सुनील डोब्रियाल डिप्टी कमांडेंट, वृषली एसीटेंट कमांडेंट, इंस्पेक्टर हनुमान और टीम ऑफ सीआरपीएफ के अन्य जवान मौजूद रहे।
शहीद के बेटे धर्मेंद्र को सीआरपीएफ में रहकर देश सेवा करने पर दी शाबाशी
बिरोहड़ गांव में शहीद जसवंत सिंह लखेरा की बेटी मंजू की शादी में पहुंचे डीआईजीपी कोमल सिंह ने शहीद के बेटे धर्मेंद्र को सीआरपीएफ में कार्यरत रहकर देश सेवा करने के लिए शाबाशी दी और अपने पिता जसवंत सिंह लखेरा के पदचिह्नों पर चलने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शहीद जसवंत सिंह के जो सपने अधूरे रह गए हैं, अब वह सपने धर्मेंद्र सिंह पूरा करेगा, ऐसा हमें विश्वास है।
शदीद जसवंत सिंह लखेरा के स्मृति स्थल पर किया नमन
शहीद जसवंत सिंह लखेरा की बेटी मंजू की शादी में पहुंचे जवानों ने गांव बिरोहड़ पहुंचने के बाद सबसे पहले गांव में बने जसवंत सिंह लखेरा स्मृति स्थल पर पहुंचकर उन्हें नमन किया और पुष्प अर्पित कर उनको श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान शहीद स्मृति स्थल को भी तिरंगा लाइट से सजाया गया। गौरतलब है कि 4 अक्तूबर 2006 को दो आतंकवादी श्रीनगर के बुरुशाह चौक स्थित स्टैंडर्ड होटल में आए थे, जिनमें से एक सादे कपड़ों में था और दूसरा पुलिस के वेशभूषा में था। उन्हें चेकिंग के लिए सिपाही विगुलर जसवंत सिंह ने रोका। इस दौरान उनकी जांच चल ही रही थी कि आतंकवादियों ने उन पर फायरिंग कर उन्हें घायल कर दिया। हालांकि इस दौरान जसवंत सिंह लखेरा अपनी अंतिम सांस तक आतंकवादियों को अंदर आने से रोकने के प्रयास में वीरगति को प्राप्त हुए।