अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जगबीर सिंह की अदालत ने सोमवार को ट्रक लूट के एक मामले में तीन आरोपियों को बरी कर दिया। सुनवाई के दौरान पीड़ित ट्रक चालक आरोपियों को पहचानने से मुकर गया। साथ ही चश्मदीद ने भी वारदात के बारे में पता होने से इनकार कर दिया। इस कारण सबूतों के अभाव में कोर्ट ने गांव हुंमायूपुर के सत्यवान, मंजीत और बिजेंद्र को बरी कर दिया।
अदालत में चले अभियोग के अनुसार 23 फरवरी 2016 को सांपला थाना पुलिस को शिकायत दी गई थी। पुलिस को दी शिकायत में भिवानी के लौहारु कडल निवासी रामप्रताप सिंह ने बताया था कि उनके कई ट्रक चलते हैं। एक ट्रक पर हिमाचल प्रदेश के ऊना निवासी विजय कुमार चालक है। उन्होंने बताया था कि विजय ट्रक लेकर 15 फरवरी को हरिद्वार से मुंबई के लिए रवाना हुआ था। उस समय ट्रक में पीयूसी पाइप और कॉस्मेटिक सामान भरा हुआ था।
जब वह 16 फरवरी को खरखौदा पहुंचा तो यहां जाम में फंस गया। आरक्षण की मांग को लेकर जगह जगह जाम लगा था। कई दिनों तक जाम नहीं खुला। जब पूरे प्रदेश में हिंसा शांत हो गई तो विजय ट्रक को लेकर 22 फरवरी को मुंबई के लिए रवाना हुआ। आरोप था कि जब वह गांव हुंमायूपुर के पास पहुंचा तो एक बाइक पर सवार तीन युवकों ने ट्रक को रोक लिया। इसके बाद तीनों ने विजय को ट्रक से नीचे उतार दिया और उसे बंधक बना लिया। इसके बाद आरोपी ट्रक को लेकर खरखौदा के जंगल में ले गए। शिकायत के अनुसार आरोपियों ने ट्रक से टायर, बैटरी, लदा हुआ सामान और चालक से 13 हजार रुपये व मोबाइल लूट लिया।
ट्रक से ही डीजल चोरी कर ट्रैक्टर ट्राली में ले गये थे सामान
इतना ही नहीं आरोप था कि आरोपियों ने ट्रक से डीजल भी निकाल लिया। बाद में आरोपी मौके पर ट्रैक्टर ट्राली लेकर पहुंचे और लूटा हुआ सामान उसमें लाद दिया था। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गये थे। सुबह होने पर चालक जैसे तैसे करके ट्रक से नीचे उतरा। उसका कहना था कि समीप में मौजूद जलघर कर्मचारी ने उसके रस्सी से बंधे हाथ पैर खोले थे।
पुलिस ने शिकायत के बाद मामले में मोबाइल लोकेशन के आधार पर हुंमायूपुर के सत्यवान को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने जांच में उसके पास से कुछ बरामदगी भी की थी। सत्यवान की निशानदेही पर गांव के ही बिजेंद्र और मंजीत को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने तीनोें आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया था।
इन बयानों पर बरी हुए तीनों
पीड़ित चालक- चालक तीनों आरोपियों को पहचानने से मुकर गया। उसने कोर्ट में कहा कि मुझे ठीक से याद नहीं है कि तीनों युवक वही हैं या नहीं जिन्होंने वारदात की थी।
जलघर कर्मचारी- मैंने चालक के रस्सी से बंधे हाथ तो खोले थे लेकिन मौके पर वारदात जैसी कोई बात सामने नहीं आई थी।
शिकायतकर्ता- शिकायतकर्ता ने भी कोर्ट में लूटे गये सारे सामान की सूची पेश नहीं की। अदालत ने पूरे मुकदमे की सुनवाई के बाद सबूतों के अभाव में तीनों को बरी कर दिया।