करीब 772 स्टाफ नर्स के सामूहिक अवकाश पर होने की वजह से बुधवार को पीजीआईएमएस में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं। नर्सिंग कॉलेज के स्टूडेंट्स नर्स के सहारे मरीजों की देखभाल की गई। मरीजों को दवाई देने के लिए डाक्टरों को आगे आना पड़ा। इसके बावजूद इमरजेंसी से लेकर वार्डों में स्थिति ठीक नहीं रही। स्टाफ नर्सों ने चेतावनी दी है कि 28 मार्च को चंडीगढ़ में होने वाली मीटिंग के बाद ठोस निर्णय लिया जाएगा। तब तक केवल मार्निंग में एक शिफ्ट ड्यूटी की जाएगी। इसके बाद कोई स्टाफ नर्स ड्यूटी नहीं करेंगी। हालांकि, पीजीआईएमएस प्रशासन व्यवस्थाओं के दुरुस्त होने का दावा करता रहा। बता दें कि केवल ओपीडी में ही सात हजार मरीज प्रतिदिन आते हैं। जबकि इमरजेंसी में सात से आठ सौ मरीज हर रोज इलाज के लिए आते हैं। इसके अलावा वार्ड भी चार-पांच हजार मरीज भर्ती रहते हैं।
पूर्व घोषणा के अनुसार, सभी स्टाफ नर्स सुबह ही पीजीआईएमएस के विजय पार्क में इकट्ठा हुईं। नर्सिंग एसोसिएशन की 20 सदस्यीय कमेटी के नेतृत्व में शुरू हुए धरने पर वक्ताओं ने कहा कि वह काफी समय से पे-ग्रेड और नर्सिंग अलाउंस चार्ज केंद्र की तर्ज पर और नर्सिंग स्टाफ से नाम बदलकर नर्सिंग ऑफिसर रखने की मांग कर रहे हैं। हर बार उनकी मांग को अनसुना कर दिया जाता है। सरकार और पीजीआईएमएस प्रशासन की अनदेखी के कारण उन्हें हड़ताल करनी पड़ रही है। दिन भर स्टाफ नर्स धरने पर बैठीं रही, लेकिन कोई भी प्रशासनिक अधिकारी उनके बीच नहीं पहुंचा। आखिर में सरकार और पीजीआई प्रशासन को चेतावनी दी कि वीरवार को सभी ड्यूटी ज्वाइन करेंगे, लेकिन शुक्रवार से केवल मार्निंग ड्यूटी की जाएगी। इवनिंग और नाइट ड्यूटी पर कोई भी स्टाफ नर्स ड्यूटी नहीं करेगी। 25 मार्च को पीजीआईएमएस प्रशासन और 28 मार्च को नर्सिंग एसोसिएशन की चंडीगढ़ में चीफ सेक्रेटरी के साथ वार्ता होगी। यदि इनमें समाधान नहीं निकला तो भविष्य में आंदोलन को लेकर ठोस निर्णय लिया जाएग।
उधर, स्टाफ नर्स के अवकाश के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रही। हालांकि, प्रशासन ने नर्सिंग कॉलेज के स्टूडेंट्स नर्स की ड्यूटी लगाई थी। डाक्टरों ने भी मरीजों को दवाई बांटी, लेकिन इसके बाद भी इमरजेंसी, जज्चा-बच्चा विभाग और वार्डों में परेशानियों का सामना करना पड़ा। सामूहिक अवकाश पर रहने वालों में कमेटी के सदस्य रविंद्र कुमार, राहुल वत्स, कप्तान सिंह, किरण अहलावत, नीलम, अनिता, श्वेता और कमलदीप आदि शामिल रहे।
अधिकारियों के कार्यालय के बाहर भी प्रदर्शन
धरने के दौरान स्टाफ नर्सों ने कुलपति डॉ. ओपी कालरा, डायरेक्टर डॉ. राकेश गुप्ता और एमएस डॉ. अशोक चौहान के कार्यालय के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया। आरोप है कि कोई भी अधिकारी उनकी सुध लेने नहीं पहुंचा और न ही किसी ने बात की। कमेटी के सदस्य रविंद्र कुमार आदि का कहना है कि अधिकारियों की अनदेखी के कारण उन्हें विरोध-प्रदर्शन करना पड़ रहा है।
टेंट लगाने की नहीं दी अनुमति, शौच के लिए नहीं जाने दिया अंदर
स्टाफ नर्सों का आरोप है कि उन्होंने विजय पार्क में टेंट लगाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन प्रशासन ने अनुमति नहीं दी। यही नहीं स्टाफ नर्सों को न अंदर पानी पीने के लिए जाने दिया गया, न ही शौचालय के लिए। जो स्टाफ नर्स धरने पर थी उन्हें सुरक्षाकर्मियों ने अंदर नहीं घुसने दिया। इससे स्टाफ नर्स में आक्रोश है।
एक वार्ड दो स्टूडेंट्स नर्स के हवाले
स्टाफ नर्सों के अवकाश पर होने के कारण वार्डों में मरीजों को खासी दिक्कत हुई। जिस वार्ड में चार स्टाफ नर्स की ड्यूटी रहती थी वहां मात्र एक या दो स्टूडेंट्स नर्स की ड्यूटी लगी थी। इनमें से अधिकतर स्टूडेंट्स नर्स ऐसी थीं, जो मरीजों को अच्छे तरीके से उपचार नहीं दे पा रहे थे। वहीं आसपास की सीएचसी से भी कुछ स्टाफ नर्स को बुलाया गया था।
मेवात और खानपुर मेडिकल कॉलेजों के स्टाफ नर्स ने भी दिया समर्थन
धरनास्थल पर वक्ताओं ने दावा किया कि सिविल अस्पताल से लेकर मेवात और खानपुर मेडिकल कॉलेज की स्टाफ नर्स ने भी उन्हें समर्थन दिया है। चेतावनी दी कि यदि शीघ्र उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो प्रदेश भर की स्टाफ नर्स आंदोलन शुरू कर देंगी।
स्टाफ नर्सों के अवकाश पर रहने के बाद भी मरीजों को परेशानी नहीं होने दी गई। मरीजों को कोई असुविधा न हो इसके लिए प्रशासन की तरफ से पुख्ता बंदोबस्त किए गए थे। सामान्य दिनों की भांति मरीजों का उपचार किया गया।
- प्रेम कुमार शर्मा, डिप्टी रजिस्ट्रार पीजीआईएमएस