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दो सगी बहनों के एक साथ डूबने से जसिया में शोक, बच्चियों की मां ने सुनाई आपबीती

Tue, 28 Jun 2016 01:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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बेटियों को बचाने उतरी मां और दोनों बेटे भी लगे थे डूबने, बेटों ने सूट पकड़कर बचाई जान - फोटो : amar ujala
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 रविवार सुबह जसिया गांव से यमुना के मीमारपुर घाट पर आस्था की डुबकी लगाने गए एक परिवार के 9 लोगों में से 7 ही जिंदा वापस आए। दो सगी बहन कुसुम और प्रभा की नदी में डूबने से मौत हो गई। बेटियों की मौत पर पूरा गांव शोक में डूबा है। पीड़ित मां सुशीला ने बताया कि जब वह यमुना घाट पर सूर्य को पानी देने लगी तो दोनों बेटी एक साथ नहाने चली गईं। सूर्य नमन के बाद पीछे मुड़कर देखा तो उसे बेटी दिखाई नहीं दी। वह अपने बेटों के साथ नदी की ओर दौड़ी। वह भी पानी में थोड़ा अंदर गई तो उसका भी पैर फिसलने लगा। मां के साथ पानी में उतरे उसके दोनों बेटे भी डूबने लगे। खुद डूब रही मां पर अब बेटियों के साथ ही दोनों बेटों को बचाने का संकट भी खड़ा हो गया। बेटों के साथ डूब रही महिला ने शोर मचाया तो पास नहा रहे लोगों की नजर उन पर पड़ गई। लोगों ने किसी तरह मां और दोनों बेटों को बचा लिया। सुशीला ने बताया कि दोनों बेटे राहुल और विकास ने उसके सूट को पकड़े रखा, इसलिए वे बच गए। एक बार तो लगा कि बेटियों के साथ बेटे भी हाथ से निकल गए हैं।
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मां जोड़ती रही हाथ नहीं मिला बचाने वाला

मां सुशीला ने बताया की लगभग एक घंटे तक वह लोगों के सामने हाथ जोड़ती रही। झोली फलाती रही, लेकिन कोई भी मदद के लिए आगे नहीं आया। मां रोती बिलखती रही। अब भी आंखों के सामने वह खौफनाक मंजर है, जिसमें पूरा परिवार ही डूबने की कगार पर पहुंच जाता है। महिला कहती है कि मेरा तो पूरा परिवार ही डूब गया था। पानी में अगर सूट छूट जाता तो यमुना मेरे बेटों को भी ले जाती।

6 में से 5 गोताखोरों ने किया मना

परिजनों ने बताया कि एक घंटे बाद पहुंची पुलिस ने गोताखोरों को बुलाया। एक बार तो सभी गोताखोरों ने पानी में डुबकी लगाई। लेकिन पानी की गहराई देखते हुए 6 में से 5 ने डुबकी लगाने से मना कर दिया। बताया जा रहा है कि पानी की गहराई इतनी थी एक गोताखोर चार से पांच मिनट में बाहर आ पा रहा था। एक घंटे के बाद गोताखोर उनकी बड़ी बेटी 20 वर्षीय प्रभा को निकाल लाया, लेकिन छोटी बेटी 14 वर्षीय कुसुम नहीं मिली। डूबने के लगभग दो घंटे के बाद कुसुम को भी निकाल लिया गया। तब तक दोनों बेटी दम तोड़ चुकी थी। छोटी बेटी का मुंह कीचड़ में धसा हुआ था।
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गोताखोर ने मांगे 1200 रुपये

परिजनों ने बताया की दोनों बेटियों को निकालने के लिए गोताखोरों ने 1200 रुपये मांगे। लेकिन बाद में 800 रुपये में मान गए।

दो दिन पहले ही आए थे नाना के घर से

परिजनों ने बताया कि गर्मी की छुट्टियों में पांचों बच्चे अपने नाना के घर गए थे। सभी बच्चे दो दिन पहले ही घर आए थे। नानी रोशनी का भी रो-रोकर बुरा हाल हो गया है। नानी तो इतना तक कहती है कि अगर उसे पता होता तो वह बच्चों को दो दिन बाद ही जसिया भेजती।  

पढ़ाई में भी थीं होशियार  

बच्चों के चाचा दलबीर ने बताया कि दोनों ही बेटी पढ़ने में भी होशियार थी। बड़ी बेटी ने तो 12वीं प्रथम क्षेणी से पास की है। जबकि छोटी भी पढ़ाई में आगे थी। परिवार में अब राहुल विकास और उनकी बहन पुरा के अलावा मां सुशीला व पिता मंजीत ही रह गये हैं। मंजीत मजदूरी कर परिवार चलाता है।
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