रोहतक में जनस्वास्थ्य विभाग के पीरबोधी डिस्पोजल सेंटर पर केमिकल ब्लास्ट में सीवर लाइन साफ करने वाली कंपनी की लापरवाही सामने आई है। अमर उजाला की खबर पर मोहर लगाते हुए पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट के आधार पर कंपनी के सुपरवाइजर प्रतीक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि जिस कमरे में खतरनाक केमिकल रखा था, उसे ठंडा रखने की उचित व्यवस्था नहीं थी। न ही कमरे पर ताला लगाया गया, जहां श्रमिक भी आते-जाते रहते थे।
उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के गांव कुचलपुर तहसील सहावर निवासी अजय सिंह ने वीरवार को बयान दिया था कि उसका बड़ा बेटा 30 वर्षीय धर्मबीर डेढ़ साल से रोहतक में एक कंपनी के स्टोर के सुपरवाइजर के तौर पर नौकरी करता था। मार्च माह में घर से ड्यूटी पर आया था।
20 जून को सुबह चार बजे रामसिहं बहादुरगंज (अलीगढ़) का फोन आया कि धर्मबीर और बिहार के कटिहार निवासी प्रेमनाथ की केमिकल ब्लास्ट में मौत हो गई है। वह रोहतक पहुंचे तो कमरे में धर्मबीर व प्रेमनाथ के शव पड़े थे। साथ ही पेरोक्साइड केमिकल के डिब्बे बिखरे हुए थे।
यह तीन लापरवाही आईं सामने
पेरोक्साइड केमिकल के लिए कमरे का तापमान 20 से 30 डिग्री के बीच होना चाहिए। कंपनी की तरफ से जिस कमरे में केमिकल रखा था, वहां एसी तो लगा था, लेकिन बिजली आपूर्ति बंद होने पर जनरेटर नहीं था। डिस्पोजल सेंटर पर जनस्वास्थ्य विभाग के बड़े-बड़े जनरेटर हैं, जो मोटर चालू करने के लिए रखे गए हैं।
50 से 60 श्रमिक एसटीपी पर बनाई गई झुग्गियों में रहते हैं। उनके रहने की उचित व्यवस्था नहीं की गई।
जिस कमरे में खतरनाक केमिकल रखा था, वहां आसानी से श्रमिक आते-जाते थे। किसी तरह का ताला नहीं लगाया गया।
जांच के बाद हादसे के पीछे कंपनी की लापरवाही सामने आई है। मृतकों के परिजनों की ओर से कोई शिकायत नहीं दी गई है। कंपनी के सुपरवाइजर के खिलाफ जांच अधिकारी अमित की रिपोर्ट पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया है।
-सन्नी सिंह, प्रभारी पुलिस चौकी सुखपुरा चौक