दिल्ली की एक इन्वर्टर-बैटरी बनाने वाली कंपनी ने सिंचाई विभाग से रिटायर्ड जेई की जमापूंजी हड़प ली। कंपनी के अधिकारियों ने फ्रेंचाइजी देने के नाम पर पीड़ित सतीश से सात लाख रुपये ले लिए। जब सतीश शिकायत लेकर रोहतक पुलिस के पास पहुंचे तो पुलिस मामले को दिल्ली से जुड़ा होने की बात कहकर दो साल तक टालती रही। अब सिविल लाइन थाने में दिल्ली स्थित कंपनी के निदेशक सहित छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। आरोपियों में पंजाब एंड सिंध बैंक का जोनल मैनेजर भी शामिल है।
शिकायतकर्ता सतीश कुमार ने बताया कि वह सिंचाई विभाग में जेई के पद से रिटायर हैं। उनका पालिका बाजार में खाली प्लॉट है। वह नवंबर 2012 में अपने मित्रों के साथ दिल्ली स्थित प्रगति मैदान गए थे। वहां कई कंपनियों की फ्रेंचाइजी को लेकर मेला लगा था। सतीश इन्वर्टर बैटरी बनाने वाली एक कंपनी के स्टाल पर गए। कंपनी के अधिकारियों से फ्रेेंचाइजी लेने की बात कही तो फ्रेंचाइजी के लिए सात लाख रुपये मांगे। इस दौरान बात पक्की हो गई। सतीश का आरोप है कि कंपनी ने फ्रेंचाइजी देने के नाम पर जनवरी 2013 से फरवरी 2014 के बीच उनसे सात लाख 10 हजार रुपये लिए, लेकिन जब कंपनी का सामान सतीश के पास पहुंचा तो वह खराब निकला। इसके बाद सतीश ने कंपनी के अधिकारियों को शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो हुई। जब सतीश को कंपनी के खराब रिकार्ड का पता चला तो उसने अधिकारियों से रुपये मांगे, मगर नहीं मिले। इसके बाद सतीश ने मामले की शिकायत पुलिस को दी। करीब दो साल तक रोहतक पुलिस सतीश को दिल्ली के चक्कर कटवाती रही, लेकिन केस दर्ज नहीं किया। अब पुलिस ने दिल्ली के न्यू राजेंद्र नगर निवासी कंपनी के निदेशक गुरप्रीत सिंह, उसकी पत्नी नीना बी. सिंह, गुड़गांव के टीसी शर्मा, वीके गुप्ता, सुनील सिन्हा और प्रवीन गुप्ता के खिलाफ धोखाधड़ी सहित कई धाराओं में केस दर्ज किया है।
ऐसे हुआ खुलासा
सतीश को रेवाड़ी और नारनौल के दो अन्य पीड़ितों ने कंपनी खराब रिकॉर्ड के बारे में बताया। सतीश ने बताया कि आरोपियों ने केवल दिल्ली के करोल बाग में एक ऑफिस खोल रखा है, इसके अलावा उनके पास कोई भी कंपनी नहीं है।
यूं फंसाते थे जाल में
आरोपियों ने भोले-भाले लोगों को फंसाने के लिए पूरा जाल बिछा रखा था। सतीश ने बताया कि कंपनी के अधिकारी क्लाइंट को लेकर सीधे डीसी शर्मा के पास पहुंचते थे। उसने गुड़गांव में फर्जी तरीके से कंपनी की फ्रेंचाइजी ले रखी थी। यहां से भी यदि कोई व्यक्ति विश्वास नहीं करता था तो उसे एक बैंक के जोनल मैनेजर के पास लेक र जाते थे।
सेल्स टैक्स विभाग ने भी लगाया 35 लाख का जुर्माना
संबंधित कंपनी पर सेल्स टैक्स विभाग भी करीब 35 लाख रुपये का जुर्माना ठोक चुका है। सतीश कुमार ने बताया कि उन्हीं की शिकायत पर सेल्स टैक्ट विभाग ने जुर्माना लगाया है। आरोप है कि कंपनी ने उन्हें बिना बिल के माल भेज दिया था। इसका खुलासा होने पर सेल्स टैक्स विभाग ने कार्रवाई की थी। कंपनी के खिलाफ पहले भी दिल्ली में दो, उड़ीसा और गुड़गांव में चार एफआईआर दर्ज हैं।