शहर में शुक्रवार को हालात इस तरह बेकाबू हो गए कि हर गली में रण शुरू हो गया। यह रण भी इसलिए ज्यादा खतरनाक था, क्योंकि यह जातीय था। जाट और गैर जाट बिरादरी के लोग आमने-सामने आ गए। उनके बीच देर रात तक संघर्ष चलता रहा। वहीं, उपद्रवी भी देर रात तक उत्पात मचाते रहे। पुलिस प्रशासन के लिए भी जातीय संघर्ष सबसे ज्यादा परेशानी खड़ी करने वाला है, उससे निपटना उसके लिए चुनौती से कम नहीं है।
रोहतक में शुक्रवार शाम को आग भड़कनी शुरू हुई और उपद्रवियों ने कई जगह पथराव और तोड़फोड़ के साथ ही आगजनी की। यह केवल मुख्य सड़कों और उसके आसपास किया गया। लेकिन हालात उस समय ज्यादा बेकाबू हो गए, जब संघर्ष जातीय बन गया।
उससे शहर की हर गली में रण होने लगा। जाट और गैर जाट बिरादरी कई जगह आमने-सामने आ गई और वहां भी खूब बवाल हुआ। यह संघर्ष देर रात तक चलता रहा। इससे लोग घरों के अंदर कैद जरूर हो गए है, लेकिन इस बवाल के कारण घर के अंदर कैद महिलाएं और बच्चे भी सुरक्षित नहीं दिख रहे। क्योंकि कब किस गली में जातीय संघर्ष शुरू हो जाए और बवाल हो, कुछ पता नहीं चल रहा है।
चंद मिनटों में एक गली तो चंद मिनट बाद ही दूसरी गली में बवाल शुरू हो जाता है। कई जगह ऐसे भी हालात हुए कि वहां जातीय संघर्ष हुआ और वहां किसी जाति के लोग पहली जंग में कमजोर पड़े। इसके बाद वे खुद को मजबूत करके दोबारा रण शुरू कर रहे थे। इन जगहों पर रहने वाले लोगों को घरों में तक नींद नहीं आ रही है, क्योंकि उनको डर है कि वहां फिर से कोई बवाल शुरू न हो जाए।
वहीं, आंदोलनकारियों का भी कहना है कि आंदोलन की आड़ में कुछ शरारती तत्वों ने यह उपद्रव किया है। कुछ शरारती तत्व आंदोलन को बिगाड़ने के लिए बवाल कर रहे हैं।