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न्याय के लिए भटक रहे एक और रेप पीड़ित के परिजन

Thu, 21 Jul 2016 01:53 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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आठ माह बाद भी नहीं पकड़ा गया दुष्कर्म का आरोपी - फोटो : Demo pic
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 भिवानी की छात्रा से गैंगरेप मामले में चारों तरफ से दबाव पड़ने पर पुलिस ने तीन आरोपियों को बेशक गिरफ्तार कर लिया, लेकिन महम क्षेत्र की एक लाचार लड़की को रेप करके गर्भवती बनाने वाले आरोपी को आठ माह बाद भी नहीं पकड़ सकी है। पीड़िता के परिजन पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। यही नहीं, पिछले आठ महीनों में परिजन पुलिस प्रशासन के छोटे से लेकर बड़े अधिकारी तक न्याय की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कहीं से भी उनकी फरियाद पर सुनवाई नहीं हुई। आरोपी गांव में घूम रहा है और पुलिस कहती है कि उसका पता नहीं चल रहा है। परिजनों का आरोप है कि आरोपी का परिवार लगातार पैसे की पेशकश करके समझौते का दबाव बना रहा है।
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पीड़िता के परिजनों ने बताया कि 8 नवंबर 2015 को महम थाने में एससी/एसटी एक्ट और धारा 376 के तहत गांव मोखरा खास के युवक पर कई बार रेप करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था। मामले में राजपत्रित अधिकारी डीएसपी पुष्पा खत्री को जांच अधिकारी बनाया गया था, लेकिन एससी/एसटी एक्ट की अधिकतम अवधि छह माह बीत जाने के बाद भी मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस बारे में पीड़ित परिवार डीएसपी, एसपी, आईजी और सीएम विंडो पर भी शिकायत कर चुका है। पत्र लिखकर अनुसूचित जाति आयोग को भी मामले की जानकारी दी जा चुकी है। लेकिन पुलिस आरोपी पर कार्रवाई नहीं कर रही है। पूछने पर बताया जाता है कि आरोपी की तलाश की जा रही है, लेकिन उसका अभी तक कोई अता पता नहीं है। जबकि आरोपी अपने गांव में ही रहता है। उच्च वर्ग से ताल्लुक रखने के कारण आरोपी का परिवार लगातार समझौते के लिए रकम की पेशकश करके दबाव बनाता रहता है। पीड़ित परिवार ने इस मामले में जल्द सुनवाई कर न्याय की मांग की है।

ये है मामला

पीड़ित परिवार ने बताया कि उनकी एक लड़की दिमागी रूप से कमजोर है। एक दिन वह अचानक बीमार पड़ गई। डॉक्टर के पास ले जाया गया तो डॉक्टर ने उसे गर्भवती बताया। जब उससे पूछा गया तो उसने बताया कि मोखरा खास का युवक उसके साथ 8-9 महीने से दुष्कर्म कर रहा है। उसने इस बारे मेें किसी को भी बताने पर परिवार को जान से मारने की धमकी दी थी। इस डर की वजह से पीड़िता ने किसी को कुछ नहीं बताया और उसकी हैवानियत झेलती रही। पीड़ित परिवार ने इस संदर्भ में आरोपी के खिलाफ 8 नवंबर 2015 को महम थाने में एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया था।
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