उपद्रव के दौरान की गई तोड़फोड़
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उपद्रव के आरोप में फंसे युवाओं को भले ही कोर्ट से जमानत मिल गई हो, पुलिस उन्हें ढील देने के मूड में कतई नहीं है। ऐसे उपद्रवियों पर पुलिस कड़ी नजर रखे है।
पुलिस को आशंका है कि ये उपद्रवी दोबारा माहौल बिगाड़ सकते हैं। जेल से बाहर आए सभी उपद्रवियों की सूची तैयार की जा रही है। यही नहीं, संबंधित थाना, चौकी और पुलिस के विशेष स्टाफ को सतर्क कर दिया गया है। अधिकारियों को भी जमानत पर बाहर आए उपद्रवियों की डिटेल भेजी गई है। उनके गांव भी पुलिस के रेडार पर हैं। यही व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू की गई है।
उपद्रवियों को छुड़वाने पहुंच रही पंचायत, टेंशन में पुलिस
आरोपियों को दबोचने के मसले पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों में बैठकों का दौर चल रहा है। जिन उपद्रवियों को गिरफ्तार किया जा रहा है उनके परिजन और ग्रामीण विरोध में एसपी ऑफिस पहुंच रहे हैं। ऐसे मेें उपद्रवियों की गिरफ्तारी ने भी पुलिस का सिरदर्द बढ़ा दिया है।
अन्य मामलों से ध्यान हटा
हिंसा के मामले में दर्ज एफआईआर के आरोपियों को पकड़ने में लगी पुलिस का ध्यान अन्य मामलों से हट रहा है। जिले में उपद्रव से जुड़ी अभी तक 1300 से ज्यादा एफआईआर दर्ज हुईं हैं। इनमें सैकड़ों आरोपियों को नामजद किया गया है। अज्ञात को पकड़ना तो दूर अभी तक पुलिस के हाथ नामजद उपद्रवी भी नहीं लग रहे हैं।
सात उपद्रवी नहीं आए पकड़ में
पुलिस ने आगजनी, लूटपाट और तोड़फोड़ करने के 83 उपद्रवियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इनमें से सात उपद्रवियों की जमानत मंजूर हो गई जबकि दो उपद्रवियों के नाबालिग होने के कारण हिसार स्थित बाल सुधार गृह में भेज दिया गया।