रोहतक के पहरावर गांव की जमीन के विवाद को लेकर नवीन जयहिंद शुक्रवार को सीनियर सिविल जज मंगलेश कुमार चौबे की अदालत में पेश हुए। अदालत जयहिंद व नगर निगम की तरफ से अपना-अपना पक्ष रखा गया। निगम का कहना है कि जमीन उसकी मलकियत है। ऐसे में उसकी अनुमति के बगैर कार्यक्रम नहीं किया जा सकता।
दोनों पक्षों से मांगे कागजात, संत गोपालदास भी पहुंचे
जबकि जयहिंद के वकील ने कहा कि जमीन निगम गौड़ ब्राह्मण संस्था को दे चुका है। ऐसे में जमीन समाज की है। अदालत ने दोनों पक्षों से चार बजे तक कागजात अदालत में जमा करवाने के लिए कहा गया था। इसके बाद जयहिंद पहरावर के लिए रवाना हो गए। उधर, गौचरण जमीन को लेकर अक्सर अनशन करने वाले संत गोपालदास भी अदालत में पहुंचे और नवीन जयहिंद से मिले। बता दें कि हुड्डा सरकार के कार्यकाल में पहरावर गांव की पंचायत ने 12 एकड़ के करीब जमीन गौड़ ब्राह्मण प्रचारिणी सभा को 33 साल की लीज पर दी थी।
अदालत तय करेगी निगम की जमीन पर 23 अप्रैल को मनाया जाएगा या नहीं परशुराम जन्मोत्सव
2022 में लीज के कागजात अपडेट न कराने से जमीन वापस नगर निगम के नाम हो गई। लोगों ने इसका विरोध किया। इस पर मुख्यमंत्री ने करनाल में घोषणा की कि जमीन गौड़ ब्राह्मण प्रचारिणी सभा को ही मिलेगी। लीज भी 2055 तक बढ़ाई जाएगी। इसकी प्रक्रिया चल रही है। इसी बीच नवीन जयहिंद ने 23 अप्रैल को पराहवर की उसी जमीन पर परशुराम जन्मोत्सव मनाने की घोषणा की थी। इसकी तैयारियां चल रही थी। वीरवार को नगर निगम अदालत पहुंचा और आरोप लगाया कि कार्यक्रम के बहाने नवीन जयहिंद जमीन पर कब्जा कर रहा है। अदालत ने जयहिंद को नोटिस भेजकर शुक्रवार को अदालत में पेश होने के लिए कहा था।