हरियाणा के रोहतक में जिला अदालत ने 12 साल पहले गोगामेड़ी के दर्शन कर गुरुग्रााम लौट रहे पिता-पुत्र का अपहरण कर 50 लाख की फिरौती मांगने के आरोपी युवक को दोषी करार दिया है। शुक्रवार को एडीजे राजकुमार यादव की अदालत ने सोनीपत जिले के गांव कामी निवासी देवेंद्र उर्फ लीलू को आजीवन कारावास व आठ हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। दोषी ने अभी जुर्माना नहीं भरा है।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक गुरुग्राम के सेक्टर 14 निवासी रामफल ने दी शिकायत में बताया कि वह अपने बेटे अमित (17) के साथ राजस्थान स्थित गोगामेड़ी के दर्शन करने गया था। पांच नवंबर 2011 को दोनों कार से गुरुग्राम लौट रहे थे। रात को जब कलानौर के नजदीक बसाना-महम रोड के पास पहुंचे तो पीछे से पीले रंग की बाइक पर पुलिस की वर्दी में दो युवक आए।
ओवरटेक करके गाड़ी रुकवा ली। नजदीक आकर गालियां देने लगे। साथ ही कनपटी पर पिस्तौल अड़ाकर कार की चाबी निकाल ली। जब तक वह कुछ समझ पाता। एक और कार आकर रुकी। उसमें पांच-छह युवक सवार थे। युवक कार में बैठ गए और पिता-पुत्र को खेत में ले गए।
वहां पर दोनों से मारपीट की और जमीन पर लेटा दिया। साथ ही दोनों को छोड़ने की एवज में 50 लाख की फिरौती मांगी। थोड़ी देर बाद युवकों ने उसे अधमरा करके सड़क पर फेंक दिया। धमकी दी कि अगर किसी को बताया तो उसके बेटे अमित की हत्या कर देंगे।
पीड़ित पुलिस के पास पहुंची और पूरे मामले से अवगत कराया। जब तक पुलिस हरकत में आई, आरोपियों ने अमित को भी छोड़ दिया था। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए दोषी देवेंद्र उर्फ लीलू के साथियों को काबू कर लिया था।
केस में दो आरोपी बरी हो चुके हैं, जबकि तीन को सजा हो चुकी है। लीलू अभी फरार चल रहा था। उसके बाद में काबू किया गया। अदालत ने शुक्रवार को आरोपी को वारदात का दोषी मानते हुए पैसे के लिए अपहरण करने पर आजीवन कारावास की सजा सुनाई।