वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु की कोठी जलाने के मामले में एक असिस्टेंट प्रोफेसर को हिरासत में लिए जाने पर शनिवार शाम को हंगामा हो गया। रूखी गांव से एसपी आवास पहुंचे ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रोफेसर को 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में रखा है और गिरफ्तारी नहंी दिखाई जा रही। आरोप लगाया कि उनके बारे में कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। जबकि पहले ही प्रार्थना पत्र देकर मामले में जांच करने की मांग की गई थी। लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने उनको पकड़ लिया।
मोखरा के राजकीय कन्या महाविद्यालय में रूखी गांव के राजेश रूखी असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान वित्तमंत्री की कोठी जलाने के मुकदमे में राजेश रूखी भी नामजद कर दिए गए। जबकि उनके वकील वजीर सिंह की ओर से पुलिस को एक नोटिस भेजा गया था। जिसमें कहा गया था कि पहले इस मामले में पूरी जांच की जाए, उसके बाद ही आगे की कोई कार्रवाई की जाए।
इस मामले में पुलिस ने नोटिस जारी करके राजेश रूखी को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया था, लेकिन वे घर नहीं पहुंचे। इस कारण गांव के काफी लोग शनिवार देर शाम एसपी आवास पर पहुंचे और हंगामा कर दिया। उन्होंने बताया कि राजेश को शुक्रवार सुबह कॉलेज से पकड़ लिया गया। उसके बाद पुलिस उनको किस जगह लेकर गई, इसकी जानकारी नहीं दी गई है।
अधिवक्ता वजीर सिंह का कहना है कि पुलिस को हिरासत में लिए हुए 24 घंटे से अधिक का समय बीत गया। यह गैर कानूनी है। हालांकि राजेश रूखी के परिजनों को एसपी शशांक आनंद ने आश्वासन दिया है कि जांच के बाद ही उन्हें जेल भेजा जाएगा। एसपी से मिलने वालों में लीला पहलवान सरपंच, सोनू, अन्नू, रामफू ल, पिंकी और रामकुमार शामिल रहे।