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डीएसपी और एसएचओ ने आठ लाख में एफआईआर में बदली धारा 

Sun, 18 Sep 2016 02:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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delhi police
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शहर के एक डीएसपी और एसएचओ पर एफआईआर में धारा बदलने का आरोप लगा है। आरोप है कि हत्या के प्रयास में फंसे व्यापारी को जमानत दिलवाने और मुकदमे में कमजोर धारा शामिल करने के लिए व्यापारी से आठ लाख रुपये वसूले। पैसे लेकर व्यापारी के खिलाफ दर्ज एफआईआर में से हत्या के प्रयास ‘307’ की धारा हटाकर धारदार हथियार से वार करने की धारा ‘324’ को शामिल कर दिया। मामला एसपी राकेश आर्य तक पहुंचा तो उन्होंने खुद ही मामले की जांच शुरू कर दी है।  
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गौरतलब है कि 31 अगस्त-2016 को व्यापारी यश भूषण जैन अपने दोस्त की कार से सोनीपत स्टैंड की तरफ आ रहे थे। जब वह शांतमई चौक पहुंचे तो कार को साइड में खड़ा कर दिया। साथ ही आगे की एक खिड़की खोल ली। तभी पीछे से एक बाइक सवार युवक आ रहा था। उसकी नजर कार की खुली खिड़की पर नहीं पड़ी।

इस कारण उसकी बाइक कार की खिड़की से भिड़ गई और वह नीचे गिर गया। इसके बाद बाइक सवार और जैन के बीच कहासुनी हो गई। मामला हाथापाई तक पहुंच गया। तभी व्यापारी ने लाइसेंसी पिस्तौल से फायरिंग कर दी। इस दौरान एक गोली सड़क के दूसरी तरफ जा रहे राहगीर ओमप्रकाश के पैर में जा लगी। ओमप्रकाश को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन राहगीर ने पुलिस को शिकायत नहीं दी।
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इसके बाद पुलिस ने बाइक सवार की शिकायत पर यश भूषण जैन और उनके दोस्त डेयरी संचालक के खिलाफ हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट का केस दर्ज किया था। बाद में दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया था। इसी एफआईआर में पुलिस ने जैन को जेल भी भेजा था। 

जमानत दिलवाने के नाम पर लाखों की मांग 
हत्या के प्रयास में जल्द जमानत नहीं मिलने के कारण यश भूषण जैन की पत्नी और उनके दोस्त जतिन बतरा व वकील शेखर शर्मा ने प्रयास शुरू किये। अब जैन के दोस्त वकील शेखर शर्मा व जतिन बतरा का आरोप है कि संबंधित थाने के एसएचओ ने एफआईआर से हत्या के प्रयास की धारा हटाने के नाम पर तीन लाख रुपये की मांग की। इस धारा की जगह धारदार हथियार से वार करने की धारा जोड़ने की बात कही गई। आरोप है कि संबंधित डीएसपी के गनर ने पांच लाख रुपये मांगे। लगातार दबाव के बाद जैन के परिवार ने आठ लाख रुपये मुहैया करवा दिये। 

और फिर मिल गई जमानत....
रुपये मिलने के बाद दोनों अधिकारियों ने मिलीभगत करके एफआईआर में धारा-307 की जगह 324 शामिल कर दी। वकील शेखर शर्मा का कहना है कि जैन को वारदात में मौके से मिली सीसीटीवी फु टेज के आधार पर भी केस में कुछ राहत मिल जाती। क्योंकि जब पुलिस ने फु टेज को खंगाला तो इसमें साफ दिख रहा था कि गोली झीना झपटी के दौरान हवा में चलाई गई थी, न की किसी व्यक्ति पर। जैन के दोस्त जतिन बतरा व वकील शेखर शर्मा ने ही एसपी को शिकायत देकर मामले में कार्रवाई की मांग की है। साथ ही सीएम विंडो पर भी शिकायत दी है। 

मामले में पेंच भी
मामले को देखा जाए तो एक बात स्पष्ट है कि वारदात स्थल पर फायरिंग हुई थी। गोली लगने से एक व्यक्ति घायल भी हुआ था। घायल की चोट को देखते हुए मेडिकल रिपोर्ट में भी गन शॉट की बात कही गई है। ऐसे में पुलिस की जांच पर सवाल उठ जाते हैं। 
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पहले इन धाराओं में दर्ज हुआ था केस
आईपीसी- 323, 353, 307, 34 और आर्म्स एक्ट।
बाद में- 324, 337 और आर्म्स एक्ट

ऐसे बदली गई धारा
धारा बदलवाने को लेकर कोर्ट में पुलिस की तरफ से तर्क दिया गया कि मामले की जांच संबंधित डीएसपी और एसएचओ ने की है। पुराना सब्जी मंडी थाना में तीन सितंबर-2016 को दर्ज मुकदमा नंबर 236 में आईपीसी की धारा 323, 353, 307 और 34 की जगह धारा 337 और 324 को शामिल कर दिया गया। 

दोनों अधिकारी छुट्टी पर 
जैसे ही मामला उजागर होने के कगार पर आया तो बताया जा रहा है कि दोनों अधिकारी लंबी छुट्टी पर चले गये हैं। जब मामले में संबंधित थाने के एसएचओ से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो फोन अन्य कार्यवाहक ने उठाया। उन्होंने बताया कि एसएचओ छुट्टी पर गये हैं। ऐसा ही जवाब डीएसपी के संबंध में आया। 

मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस ने अपने स्तर पर जांच शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक हमारे पास इस संबंध में कोई शिकायत नहीं आई है। फिर भी मैं खुद जांच-पड़ताल में शामिल हूं। यदि किसी भी पुलिस अधिकारी और कर्मचारी पर आरोप सिद्ध होते हैं तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। केस भी दर्ज किया जाएगा। अभी तक कोई सबूत शिकायतकर्ताओं की तरफ से नहीं सौंपे गये हैं। 
- राकेश आर्य, एसपी रोहतक 

पुलिस ने बड़ा खेल करके एफआईआर से हत्या के प्रयास की धारा हो हटाया है। जबकि शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में कहा है कि उसके ऊपर जान से मारने की नीयत से गोली चलाई गई थी। इसके बाद कानूनी तौर पर हत्या के प्रयास की धारा को किसी भी तरीके से नहीं हटाया जा सकता है। यदि पुलिस ने धारा हटा दी है तो कोर्ट में सुनवाई के दौरान फिर से धारा को शामिल किया जा सकता है। 
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- ओपी चुग, वरिष्ठ अधिवक्ता  
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