रोहतक। पीजीआईएमएस से एक महिला द्वारा चोरी किया गया बच्चा अलर्ट होने के चलते कुछ ही घंटों बाद मिल गया, लेकिन शुक्रवार को ट्रॉमा सेंटर में निजी सुरक्षा गार्डों ने एक और महिला को सर्जरी का सामान छिपाकर ले जाते पकड़ा है। सुरक्षा गार्डों ने आरोपी महिला को सामान सहित पुलिस के हवाले कर दिया। चर्चा है कि कुछ डॉक्टर और स्टाफ का प्रयास था कि आरोपी महिला को छोड़ दिया जाए। ऐसा न होने पर सुरक्षा गार्डों पर ही सवाल उठा दिया गया है।
संस्थान हर माह सुरक्षा के लिए निजी सुरक्षा कंपनी को एक करोड़ रुपये से अधिक बिल अदा करता है। इसके बदले कंपनी 675 गार्ड संस्थान को तीन शिफ्टों में देती है। इसमें 634 गार्ड, 20 गनमन व 21 सुपरवाइजर शामिल हैं और यहां इसमें से 110 महिला गार्ड तैनात हैं। इसके बावजूद यहां चोरी अन्य घटनाएं नहीं रुक रही हैं। इसके लिए जिम्मेदार स्वयं यहां के डॉक्टरों व स्टाफ को भी माना जाता है। क्योंकि जब असामाजिक लोगों को पकड़ा जाता है तो संस्थान से ही उन्हें छोड़ने की बात कही जाती है। शुक्रवार को भी ऐसा ही हुआ। ट्रॉमा सेंटर के गेट पर तैनात गार्डों ने एक महिला को संदेह पर रोका तो उसके पास सर्जरी के सामान की खेप मिली। वह महिला सरकारी सामान को छिपा कर ले जा रही थी। गार्डों ने महिला को पकड़ कर सुरक्षा अधिकारी के कंट्रोल रूम में पहुंचा दिया और वहां से महिला को सीधा पीजीआईएमएस थाना भेज दिया गया। इस दौरान संस्थान के ही कई लोगों ने इस कार्रवाई को रोकने की कोशिश की और कुछ न उसे छोड़ देने को कहा। इस मामले में संस्थान के जनसंपर्क विभाग के प्रभारी डॉ. वरूण अरोड़ा से बात की गई तो उन्होंने पूरे मामले को कुलपति के संज्ञान में लाने की बात कही है।
उठाया जा रहा सवाल
सवाल उठाया जा रहा है कि एक सामान्य महिला मेडिकल सर्जरी के सामान का क्या करेगी। वह इसे बाहर कहीं बेच भी नहीं सकती। इसका प्रयोग सिर्फ डॉक्टर ही कर सकता है। आशंका जताई जा रही है कि कहीं सरकारी सामान किसी निजी अस्पताल में प्रयोग तो नहीं होता। क्योंकि संस्थान में अकसर बाहर से दवा मंगाई जाती है और बचने वाली दवा को वापस कर दिया जाता है। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने स्वयं माना है कि वह कोई भी सामान खुले में रख देते हैं तो वह बाहर निजी जांच केंद्रों में मिलता है। लेकिन पता नहीं चल पाता कि ऐसा कौन करता है। वहीं पकड़े जाने पर कुछ डॉक्टरों द्वारा बचाव भी किया जाता है।
ऐसे है गार्डों की तैनाती लगभग में
लेबर रूम : 18
ट्रॉमा सेंटर : 20
ओपीडी : 42
अधिकारियों के घरों की सुरक्षा
वीसी नौ, निदेशक छह, रजिस्ट्रार दो, एमएस दो
सीसीटीवी की व्यवस्था में
लेबर रूम : 15 से 16
ट्रॉमा सेंटर : 20
निदेशक कार्यालय : 15
वीसी कार्यालय : 20
आपात विभाग : 20
ओपीडी, कैदी वार्ड, एमएस कार्यालय व डॉक्टर गेट पर कोई नहीं
अधिकारियों के कार्यालय पर सुरक्षा का प्रबंध
पीजीआईएमएस के डॉक्टरों की सुरक्षा गार्ड, गनमैन, महिला गार्ड व पर्सनल पीएसओ की ओर से की जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि निजी सुरक्षा गार्डों की लंबी लिस्ट तो अधिकारियों की ही सुरक्षा में तैनात है। इसके बाद अन्य डॉक्टरों व मरीजों की सुरक्षा कौन करे।
- वीसी : एक गनमैन, तीन गार्ड, एक सुरक्षा गार्ड मेन गेट पर व पिछले गेट पर एक व दो कार्यालय के बाहर
- निदेशक : एक गनमैन, एक महिला गार्ड, एक पीएसओ, एक गनमैन व एक अन्य
- कुलसचिव : एक गनमैन, एक महिला गार्ड, एक पीएसओ व एक अन्य
- एमएस कार्यालय : पांच गार्ड, एक गनमैन, एक महिला गार्ड, एक अन्य तथा एक पीएसओ
अधिकारी की सरकारी गाड़ी आउट सोर्स का गार्ड चलाता है
ये मामले रहे हैं चर्चाओं में
- निजी सुरक्षा कंपनी पर संस्थान के अधिकारियों के साथ मिल कर करोड़ों का घपला करने का आरोप
- सुरक्षा गार्डों ने आठ करोड़ से अधिक का अवैध इम्प्लांट बाहर ले जाते समय धरा, जांच अधर में
- लेबर रूम से चोरी हुआ नवजात का सितंबर 2017 से पता नहीं
- ब्लड बैंक के बाहर मिला ब्लड पैकेट, जबकि रिकार्ड रजिस्टर मिला ओके
- बाहरी व अवैध व्यक्तियों की ओटी व वार्ड में दखलअंदाजी
सीसीटीवी है लेकिन वाच करने वाले नहीं
संस्थान में सीसीटीवी कैमरे तो हैं, लेकिन इन पर निगरानी रखने के लिए कोई कंट्रोल रूम नहीं है। जगह-जगह बने कंट्रोल रूम अलग-अलग लोगों के पास हैं। ये अपनी सुविधा के हिसाब से इन्हें आपरेट करते हैं। जबकि नियमानुसार सीसीटीवी का कंट्रोल संस्थान के कंट्रोल रूम में व अधिकारियों के कक्ष में होना चाहिए।