फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अमर उजाला खास से संबंधित फाइल नंबर-दो

विज्ञापन
विज्ञापन
हरियाणा में आते ही वीआईपी बन जाते हैं बंदी
विज्ञापन

- पुलिस कराती है बंदियों को मौज, पुलिस सुरक्षा से हो चुके हैं कई बंदी फरार
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
हरियाणा में आते ही विभिन्न राज्यों के बंदी वीआईपी बन जाते हैं। पुलिस चंद रुपयों की लालच में बंदी को खूब मौज कराती है। हरियाणा में पुलिस सुरक्षा से बंदियों के फरार होने की कई घटनाएं भी हो चुकी हैं।
फ्लैश बैक में जाएं तो करीब चार माह पूर्व ही सोनीपत से केरल का एक बंदी कोर्ट में पेशी पर लाते समय फरार हो गया था। हालांकि बाद में उसे पकड़ लिया गया था। इसके अलावा बीती 7 फरवरी को रोहतक पीजीआई से सुरक्षा में तैनात हेड कांस्टेबल से हाथापाई करके एड्स पीड़ित बंदी फरार हो गया था। हालांकि बाद में बंदी को राजस्थान के अलवर से गिरफ्तार कर लिया गया था।
विज्ञापन

इसके अलावा भी कई मामले हो चुके है। हर बार देखने में आता है कि बाहरी जिले या फिर राज्य की पुलिस हरियाणा की सीमा में प्रवेश करते ही पेशी के लिये लाए जा रहे बंदी को सामान की खरीददारी कराने से लेकर बढ़िया रेस्टोरेंट में खाना तक खिलाती है। जिसके कारण कभी भी बंदियों के भागने की घटना हो सकती है। विभागीय अधिकारी सब कुछ जानते हुये भी लापरवाह पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करना तक मुनासिब नहीं समझते हैं।

हरियाणा समेत चार राज्यों की पुलिस की हुई थी किरकिरी
यूपी के मुजफ्फरनगर जिला निवासी कुख्यात भूरा को 14 दिसंबर 2014 को यूपी के ही बागपत जिले से उस समय पुलिस अभिरक्षा से छुड़ा लिया गया था जब उत्तराखंड पुलिस उसे कोर्ट में पेशी करने के लिये जा रही थी। पुलिसकर्मियों की आंखों में मिर्च झोंककर वारदात को अंजाम दिया गया था। घटना को हरियाणा के सोनीपत निवासी बदमाश सद्दाम के अलावा, दिल्ली, यूपी व उत्तराखंड के बदमाशों ने अंजाम दिया था। घटना के बाद यूपी व यूके पुलिस ने भूरा पर दस लाख का इनाम कर दिया था। हरियाणा पुलिस को भी भूरा को तलाशने के लिये लगाया गया था। चारों राज्यों की पुलिस की मदद से ही भूरा को पकड़ा जा सका था। इस घटना के बाद भी विभिन्न राज्यों की पुलिस सबक लेती नजर नहीं आ रही है।
विज्ञापन



बंदियों को पेशी पर लाने का नियम
एसपी के पीआरओ सन्नी के अनुसार यदि बाहरी राज्य या फिर जिले से किसी कुख्यात बंदी को पेशी पर लाना होता है तो संबंधित जिले की पुलिस ही उसे अपनी सुरक्षा में गाड़ी से लाती है। यदि बंदी कुख्यात नहीं होता है तो पुलिसकर्मी अन्य वाहन से भी उसे कोर्ट में ला सकते हैं। यदि जिस जिले में बंदी की पेशी होनी है, वहां से पुलिस सुरक्षा की आवश्यकता होती है तो इसके लिये संबंधित जिले का एसपी या अन्य अधिकारी संबंधित जिले के एसपी को अवगत करायेंगे। इसके बाद जिस जिले में पेशी होनी है, वहां की पुलिस बंदी को पुलिस एस्कॉर्ट देगी, कड़ी सुरक्षा में ही बंदी को कोर्ट तक लाया व पेशी के बाद ले जाया जाएगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें