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दंगों में आखिर किसने लूटे महम के सरकारी कार्यालय

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दंगों में आखिर किसने आग लगाकर लूटा महम के डीएसपी, एसडीएम व तहसील कार्यालय को
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: तीन मामलों में गिरफ्तार सात युवक साक्ष्यों के अभाव में बरी
: एडीजे अश्वनी कुमार की अदालत ने सुनाया फैसला
: फरवरी 2016 में महम लघुसचिवालय में हुई थी आगमनी व तोड़फोड़
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान फरवरी 2016 में भड़के दंगों के दौरान आखिर किसने महम के लघुसचिवालय स्थित डीएसपी कार्यालय, तहसील कार्यालय व एसडीएम आफिस को किसने लूटपाट कर आग लगाई। तीनों मामलों में गिरफ्तार सातों युवकों को एडीजे अश्वनी कुमार की अदालत ने सोमवार को बरी कर दिया। बरी होने वालों में बाहदशापुर निवासी प्रदीप उर्फ काला, मदनहेड़ी हिसार निवासी सागर, नारनौंद हिसार निवासी जगबीर, बल्लू महम, जितेंद्र व विकास निवासी फरमाणा शामिल हैं।
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मामले के अनुसार 24 फरवरी 2016 को महम थाने में केस दर्ज किया गया था कि उपद्रव के दौरान भीड़ ने डीएसपी कार्यालय में न केवल तोड़फोड़ की, बल्कि आग लगा दी। साथ ही चालान ब्रांच की अलमारी से 10 हजार 600 रुपये भी निकाल कर ले गए। वहीं, तहसील कार्यालय में पूरा रिकार्ड जला दिया। इसके अलावा एसडीएम कार्यालय में रिकार्ड जला दिया गया। मामलों में पुलिस ने सात युवकों को गिरफ्तार किया था, लेकिन पुलिस कोई रिकवरी नहीं कर सकी। इसके चलते साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट ने आरोपियों को क्लीनचिट दे दी।
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