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चार महिलाओं का मिटा सुहाग, मासूमों का छिना निवाला

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रोहतक। एसटीपी पर हुए हादसे में चार लोगों की मौत से उनके घरों पर गमगीन माहौल है। पति की मौत पर जहां उनकी पत्नियों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, बच्चों को देखकर लोगों की जुबान से एक ही शब्द निकल रहा है, हे भगवान ऐसा दुश्मन के साथ भी नहीं करना। वहीं, संजय की शादी डेढ़ महीने पहले हुई थी। हादसे के बारे में रात तक उसकी पत्नी को कुछ नहीं बताया गया। उनके परिजनों के आने का इंतजार किया जा रहा है।
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मुझे डॉक्टर को दिखाने के लिए कह कर गया था रणजीत
पति की मौत के बाद बिलख रही काजल ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ पालिका कॉलोनी में रहती है। वह चार माह की गर्भवती है। मंगलवार शाम उसकी तबीयत खराब हो गई। बुधवार सुबह करीब सात बजे रणजीत सोकर जागा। सबसे पहले उसने कहा कि 9 बजे तक तैयार हो जाए, डॉक्टर को दिखाने चलना है। कुछ देर बाद एक परिचित आया और काम पर चलने को कहने लगा। रणजीत दोपहर में डॉक्टर को दिखाने की बात कह चला गया। 11 बजे सूचना मिली कि उसकी टैंक में डूबकर मौत हो गई है। यह बात सुनकर उसके ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उसके तीन लड़की और एक लड़का है, समझ नहीं आ रहा कि रणजीत के जाने के बाद कैसे उनका पेट भरेगा। यदि कोई सहारा नहीं मिला तो उसके बच्चे तो भूखे ही मर जाएंगे। वहीं, बुजुर्ग मां बीना ने रोते हुए बताया कि रंजीत की बदौलत ही परिवार दो वक्त की रोटी खा रहा था, अब भगवान ने वह भी छीन ली।

धर्मेंद्र के बच्चों के सामने दो जून की रोटी का संकट हुआ
शौरा कोठी निवासी प्रमेंद्र ने बताया कि उसका भाई धर्मेंद्र (35) ठेके पर काफी समय से सीवर सफाई का काम करता था। उसके दो पुत्र आकाश (19), बसू (चार) व बेटी कोमल (14) है। वह परिवार में अकेला ही कमाने वाला था, जिससे जिंदगी गुजर बसर हो रही थी। उसने बताया कि सुबह धर्मेंद्र घर पर था, तभी एक व्यक्ति ने आकर जबरन काम पर चलने का दबाव बनाया। पहले तो भाई ने काम पर जाने से इनकार किया मगर ज्यादा दबाव पड़ा तो जाने के लिए तैयार हो गया। उसके जाने के करीब एक घंटे बाद क्षेत्र में अफवाह फैली कि सीवर टैंक में गैस का रिसाव होने से उसकी मौत हो गई है, तो परिवार पर बज्रपात हो गया। बदहवास होकर परिवार के सदस्य एसटीपी की तरफ दौड़ लिए। उसने बताया कि वह परिवार में एकमात्र कमाने वाला था, जिसकी बदौलत सभी की भूख मिटती थी।
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डेढ़ साल पहले स्थायी नौकरी लगी थी अनिल की
कैथल के चंदाना गेट निवासी अनिल सैनी पुत्र ज्ञानीराम सैनी की करीब डेढ़ साल पहले पब्लिक हेल्थ विभाग में स्थायी पद पर नौकरी लगी थी। उसकी परिवार कैथल में रहता था जबकि वह रोहतक में। वह घर में इकलौता कमाने वाला था। पिता हार्ट के मरीज हैं, जिनकी कुछ समय पहली बाईपास सर्जरी करवाई थी। उसके दो छोटे बच्चे हैं। अनिल के भाई अमित ने बताया कि अनिल की जब नौकरी लगी तब से परिवार में आर्थिक संकट दूर हुआ और सब राजी खुशी से रहने लगे। अब परिवार को घोर संकट पैदा हो गया है।

डेढ़ महीने पहले हुई थी संजय की शादी
ऊंचाहार निवासी संजय की शादी डेढ़ महीने पहले हुई थी। करीब 10 दिन पहले ही वह नवविवाहिता पत्नी को लेकर रोहतक आया था। जब हादसे में संजय की मौत हो गई तो लोगों ने उसके घर पहुंचकर नवविवाहिता से बातें बनाकर परिजनों का मोबाइल नंबर लिया। जब पत्नी को किसी अनहोनी की आशंका हुई तो उसने पूछताछ करना शुरू कर दिया। लोगों ने उसे अकेला देख यह बताया कि संजय के नौकरी को लेकर कुछ कागजात में लिखा पढ़ी होनी है। वह काम कर रहा है, उसके कहने पर ही फोन नंबर आदि लेने के लिए आए हैं। इसके बाद शाम को पहुंचे संजय का दोस्त उसकी पत्नी को अपने घर ले गया और उनके परिजनों के आने का इंतजार किया।
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