रोहतक में दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहे बच्चियों से दुराचार के मामले
बाहरी से ज्यादा अपने ‘खेल’ रहे बच्चियों से
पोर्न की आसान उपलब्धता से बढ़े मामले
पोर्न ने जगाई दरिंदगी, मासूमियत के कारण बच्चियां बनीं आसान शिकार
- पोक्सो एक्ट के मामले तीन साल में 10 से बढ़कर 36 के आंकड़े पर पहुंचे
- दुष्कर्म और छेड़छाड़ के मामलों में भी हुई बढ़ोत्तरी, महिला उत्पीड़न में बदनाम रहा है रोहतक
शनि शर्मा
रोहतक।
बच्चियों से दुराचार के मामले रोहतक जिले में हर साल दो गुनी रफ्तार से बढ़ रहे हैं। पिछले तीन साल के आंकड़े गवाह हैं कि बच्चियों की सुरक्षा के मोर्चे पर पुलिस बुरी तरह फेल साबित हुई है। वर्ष 2015 में पोक्सो एक्ट के तहत कुल 10 मामले आए थे। जो वर्ष 2016 में दोगुने से ज्यादा बढ़कर 23 हो गये। इस साल नवंबर तक पोक्सो एक्ट के तहत 36 मामले दर्ज हो चुके है। बच्चियां कभी बाहरी लोगों के यौन शोषण का शिकार हो रही हैं तो कभी उसके अपने ही उसे हैवानियत का शिकार बना रहे हैं। इसके बावजूद ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस के पास कोई ठोस रणनीति नहीं है, जिससे बच्चियों के खिलाफ होने वाले दुराचार के मामलों को कम किया जा सके।
बच्चियों के खिलाफ होने वाले यौन उत्पीड़न के मामले में पुलिस पोक्सो एक्ट में केस दर्ज करती है। पिछले तीन वर्ष में जिले के विभिन्न थानों में पोक्सो एक्ट के 69 केस दर्ज किये गये। इन मामलों में पुलिस ने करीब 63 आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेजा। मगर प्रत्येक साल मामले बढ़ते गये। करीब 16 एफआईआर कैंसिल भी की गईं।
पोक्सो के मामलों पर एक नजर
वर्ष केस अनट्रेस कैंसिल गिरफ्तारी
2015 10 1 4 25
2016 23 0 2 10
2017 नवंबर तक 36 0 10 28
5 में से 2 केस में करीबियों ने बनाया शिकार
जांच पड़ताल में सामने आया कि पोक्सो एक्ट में दर्ज किये जाने वाले प्रत्येक पांच मामलों में से दो केस में करीबियों ने ही बच्चियों का यौन शोषण किया। वर्ष 2016 और 2017 में दो पिताओं पर ही बेटी के साथ दुराचार करने का केस महिला थाने में दर्ज किया गया। जबकि अन्य मामलों में बाहरी लोगों मासूम को बहला फुसलाकर शिकार बनाया गया। पीजीआईएमएस के मनोचिकित्सा विभाग के अध्यक्ष डॉ राजीव गुप्ता का कहना है कि बच्चियों के यौन शोषण से संबंधित आने वाले अधिकतर मामलों में पीड़ित के परिचित ही आरोपी होते है। इनमें चालक, शिक्षक सहित परिवार के अन्य सदस्य शामिल हैं।
बच्चियां इसलिए बन रही सॉफ्ट टारगेट
- देश में सेक्स एजूकेशन का अभाव।
- उम्र कम होने के कारण बच्चियों को पता नहीं होता बेड और गुड टच का अंतर
- अभिभावकों और बच्चियों में संचार का अभाव।
- बदनामी के डर से अकसर बच्ची की शिकायत को गंभीरता से नहीं लेते अभिभावक
- स्कूलों में यौन उत्पीड़न के संबंध में जागरूकता कार्यक्रम का न होना
दुष्कर्म और छेड़छाड़ के मामले में बढ़े
बच्चियों के उत्पीड़न के मामले में तो पुलिस विभाग की किरकिरी हो ही रही है। महिला अपराध से जुड़े दुष्कर्म और छेड़छाड़ के स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे मामले भी वर्ष 2016 के मुकाबले 2017 में बढ़े है। हालांकि इन दो साल में दुष्कर्म के 37 और छेड़छाड़ के 60 केस जांच में झूठे पाए गये है। दो साल में 200 से ज्यादा आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
दुष्कर्म के केस (आंकड़ों में)
वर्ष केस अनट्रेस कैंसिल
2016 60 0 18
2017 नवंबर तक 83 0 19
छेड़छाड़ के केस (आंकड़ों में)
वर्ष केस अनट्रेस कैंसिल
2016 125 2 50
2017 210 0 10
58 महिला पुलिसकर्मियों के जिम्मे महिला अपराध की रोकथाम
जिले भर में महिला पुलिस कर्मियों की कम संख्या के कारण भी पीड़ित पक्ष को न्याय के लिए जूझना पड़ता है। जिले भर में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध के अधिकतर केस महिला थाने में दर्ज किये जाते हैं। लेकिन यहां पर मात्र 58 महिला पुलिस कर्मचारी कार्यरत है। इनमें से करीब दस महिला पुलिस कर्मचारी जांच अधिकारी हैं। इस कारण महिला थाने पर लगातार कार्य का भार बढ़ता जा रहा है। यदि कोई महिला अन्य थाने में भी शिकायत लेकर जाती है तो उसे महिला थाने में ही भेज दिया जाता है।
महिला थाने में स्टाफ स्थिति
महिला इंस्पेक्टर- 1
महिला एसआई- 3
महिला एएसआई- 4
हेड कांस्टेबल- 3
कांस्टेबल- 47
नोट: इसके अलावा गिरफ्तारी और छापेमारी के दौरान महिला पुलिस की मदद के लिए 12 पुरुष पुलिस कर्मियों को महिला थाने से अटैच किया गया है।
मात्र दो थानोें और एक चौकी का जिम्मा महिला अधिकारी पर
महिला पुलिस के प्रतिनिधित्व की हालत यह है कि जिले के 13 पुलिस थानों में से मात्र दो थानों और एक पुलिस चौकी का जिम्मा महिला पुलिस अधिकारी को दिया गया है। महिला थाने में इंस्पेक्टर गरिमा और पुरानी सब्जी मंडी थाने में इंस्पेक्टर सुनीता को तैनात किया गया है। इसके अलावा सेक्टर 14 पुलिस चौकी में महिला एएसआई सुशीला की तैनाती है।
बदनाम रहा है रोहतक
नेपाली युवती गैंगरेप और हत्या
एक फरवरी 2015 को रोहतक की चिन्यौट कॉलोनी में रहने वाली नेपाल मूल की युवती गायब हो गई थी, बाद में चार फरवरी को बहुअकबरपुर गांव के खेतों में उसका शव मिला था. पोस्टमार्टम में युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म की पुष्टि हुई, जिसमें पता चला कि दुष्कर्म के बाद उसके साथ हैवानियत की सारी हदें पार की गई थीं, जिस कारण उसकी मौत हो गई थी। इस मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीमा सिंघल ने सात दोषियोें को फांसी की सजा सुनाई थी।
छेड़छाड़ से तंग सहेलियों ने की थी आत्महत्या
आए दिन होने वाली छेड़छाड़ से तंग आकर दो सहेलियों ने 25 अगस्त 2014 को कोचिंग सेंटर में ही कोल्ड ड्रिंक में जहरीला पदार्थ मिलाकर पी लिया था। पीजीआई में दोनों ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था। उन्होंने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा था जिसमें छेड़छाड़ सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए। पुलिस ने इस मामले में कोचिंग संचालक व चार किशोरों को गिरफ्तार किया था।
रोडवेज बस छेड़छाड़ प्रकरण
सोनीपत के गांव निवासी दो बहनों के साथ रोडवेज बस में छेड़छाड़ का मामला सामने आया था। इस मामले ने भी प्रदेश भर में काफी तूल पकड़ा था। धरना प्रदर्शन, कैंडल मार्च और हंगामे के बाद पुलिस ने तीन युवकों के खिलाफ केस दर्ज कर गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने सुनवाई के बाद तीनों को बरी कर दिया था।
वर्जन
इस तरह के मामलों में कमी लाने के लिए बच्चों को सेक्स एजूकेशन देना जरूरी है। ताकि ऐसी किसी घटना के बारे में वह जानता हो और तुरंत अपने अभिभावकों को बता सके। ऐसे मामलों में बढ़ोत्तरी का एक कारण पोर्न मूवी भी है। लोगों को आसानी से इंटरनेट पर पोर्न मूवी मिल जाती है। इससे उनकी मानसिकता में परिवर्तन आता है। अभिभावकों को अपने बच्चों के साथ लगातार बातचीत करनी चाहिए। ताकि वह खुलकर अपनी बात रख सके।
डॉ. राजीव गुप्ता, विभागाध्यक्ष, मनोचिकित्सा विभाग पीजीआईएमएस
वर्जन
ऐसे मामलों में कमी लाने के लिए जिला पुलिस की तरफ से स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम किये जा रहे हैं। इस संबंध में डीजीपी ने आदेश जारी किये थे। साथ ही स्कूल प्रबंधन के साथ बैठक करके मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। ऐसी घटनाओं में जागरूकता अभियान चलाने निश्चित तौर पर कमी आएगी। पुलिस वारदात में शामिल आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करती है।
- नारायणचंद, डीएसपी रोहतक