2014 में किसान के बेटे का अपहरण कर दो करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। पांच दिन बाद पुलिस ने यूपी के बागपत से युवक को बरामद किया था। हुड्डा सरकार के लिए चुनौती केस बन गया था, गुरुग्राम में तैनात एसपी विवेक शर्मा ने लोकेशन ढूंढी थी। दोषियों में छह यूपी के रहने वाले, दो झज्जर, एक रोहतक, एक कोसली (रेवाड़ी ) व एक दिल्ली का निवासी है।
हरियाणा के रोहतक के कलानौर के प्रतिष्ठित किसान के बेटे 11वीं के छात्र का अपहरण कर दो करोड़ रुपये की फिरौती मांगने के सभी 11 आरोपियों को अदालत ने बुधवार को दोषी करार दिया है। 31 मार्च को एएसजे राजकुमार यादव की अदालत द्वारा फैसला सुनाया जाएगा।
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पीड़ित पक्ष के वकील ओपी चुघ ने बताया कि किसान का बेटा रोहतक के एक नामी स्कूल में पढ़ता था। हर रोज होंडा सिटी गाड़ी से स्कूल आता व जाता था। इसका पता उसके दोस्त को था। दोस्त ने अपने पिता किशनपुरा निवासी अजय को बताया। अजय ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर छात्र का अपहरण कर फिरौती मांगने का प्लान बनाया।
योजना के तहत 15 मई 2014 को स्कूल से किसान का बेटा कार से घर लौट रहा था। रास्ते में एक कार ने ओवरटेक कर रोक लिया। कार में सवार तीन लोगों में एक पुलिस की वर्दी में था। उन्होंने छात्र को अपनी गाड़ी में बैठा लिया। इसके बाद उसे यूपी के बागपत ले गए। अगले दिन परिजनों के पास कॉल आई। कहा कि दो करोड़ रुपये भिजवा देना, तब उनके बेटे को छोड़ा जाएगा।
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जगह व समय बाद में बताएंगे। मामला तत्कालीन सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा तक पहुंच गया। विपक्ष कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठाने लगा क्योंकि उसी साल विधानसभा चुनाव होने थे। पांच दिन तक पुलिस छात्र को तलाश करती रही। इसी बीच रोहतक में एसपी रहे विवेक शर्मा के पास भी मामला पहुंचा क्योंकि वे उस समय गुरुग्राम एसीपी थे।
उन्होंने रोहतक पुलिस को बताया कि जिन नंबर से फिरौती मांगी गई है, उसकी लोकेशन यूपी के बागपत में है। 20 मई को रोहतक पुलिस ने बागपत के खेत में बने कमरे में दबिश देकर छात्र को मुक्त करा लिया। इसके बाद वारदात की परतें खुलती गईं।
एक के बाद 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया तभी से अदालत में केस की सुनवाई चल रही थी। बुधवार को अदालत ने आरोपियों को धारा 364ए, आर्म्ज एक्ट व 380 के तहत दोषी करार दिया। अब सजा 31 मार्च को सुनाई जाएगी।