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देश के लिए अच्छा नहीं था 1976-77 का समय, मैं भी गया था जेल : राज्यपाल

Mon, 24 Apr 2017 02:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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एमडीयू के दीक्षांत समारोह में पहुंचे राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी - फोटो : amar ujala
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एमडीयू के कुलाधिपति और राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि वर्ष 1976-77 में देश के हालात सामान्य नहीं थे। आपातकाल जैसे विपरीत दौर में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। आपातकाल में मुझे भी जेल जाना पड़ा था। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़कर महर्षि दयानंद और स्वामी विवेकानंद के सपनों को साकार करें। भविष्य में कभी भी आपातकाल जैसे हालात न होने दें। वह रविवार को एमडीयू में हुए 16वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे।
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 उन्होंने डिग्री लेने वाले विद्यार्थियों से कहा कि जिस संस्थान से आप जुड़े हैं वह हमेशा आपके साथ रहेगा। इसीलिए जहां भी जाएं वहां पर महर्षि दयानंद का स्वरूप दिखना चाहिए। इस डिग्री के लिए जितनी मेहनत विद्यार्थियों ने की है, उतना ही योगदान शिक्षकों और माता-पिता का भी है। उन्होंने यूनिवर्सिटी की उपलब्धियों के साथ-साथ डिग्री लेने वाले विद्यार्थियों को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि देश में 11 फीसदी युवा ही यूनिवर्सिटी तक पहुंच पाते हैं, जबकि अमेरिका में 83 फीसदी युवा यूनिवर्सिटी तक पहुंचते हैं। यूनिवर्सिटी तक पहुंचने वाले युवाओं से देश को ज्यादा उम्मीदेें हैं। उन्होंने कवि मैथिलीशरण गुप्त की कविता ‘जिसको न निज गौरव तथा निज देश का अभिमान है, वो नर नहीं, नर पशु निरा है और मृतक के समान है’ सुनाकर विद्यार्थियों में जोश भरा। उन्होंने कहा कि ऐसा काम न करें, जिससे खुद पर लज्जा हो। उन्होंने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।  

मथुरा से रहा महर्षि दयानंद का सीधा जुड़ाव

राज्यपाल प्रो. सोलंकी ने कहा कि महर्षि दयानंद का सीधा जुड़ाव उत्तर प्रदेश के मथुरा से रहा। महर्षि दयानंद ने मथुरा में अपने गुरु बिरजानंद से दीक्षा ली। डिग्री का महत्व उतना ही है, जितना दीक्षा का। स्वामी जी दीक्षा में गुरु को खास तोहफा देना चाहते थे। गुरु बिरजानंद को लौंग बहुत पसंद थी तो स्वामी जी ने मित्रों से पैसे का प्रबंध करके गुरुदक्षिणा में लौंग अर्पित कर दी। लेकिन गुरु ने लौंग को सामान्य दक्षिणा बताते हुए लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि जीवन अमूल्य है, इसे गुरुदक्षिणा में दें। स्वामी जी ने यह गुरुदक्षिणा देने में एक मिनट भी नहीं लगाया। इसके बाद ही स्वामी दयानंद ने विश्व में वैदिक ज्ञान के प्रचार-प्रसार में अपना जीवन समर्पित कर दिया।
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पहले तूड़े के कमरे में मिलती थी डिग्री : मनीष ग्रोवर

समारोह में प्रदेश के सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर ने कहा कि पहले तूडे़ के कमरे में डिग्री मिल जाती थी। शिक्षा, स्वास्थ्य और राजनीति में भारी गिरावट आई है, लेकिन अब भाजपा सरकार में इन तीनों में सुधार हो रहा है। शिक्षा तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में पदार्पण करने वाले व्यक्तिओं में सेवा भाव होना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि यूनिवर्सिटी में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थी समाजसेवा में योगदान देंगे।
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