संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। शहर से आठ किलोमीटर दूर स्थित गांव सुनारिया कलां के रजबहा से जलघर में दूषित पानी पहुंचने का मामला सामने आया है। सुनारिया कलां के ग्रामीणों का कहना है कि जलघर से आने वाला पानी पीला होता है, जो पीने लायक नहीं होता। इसको पीकर बीमार होने की आशंका बनी हुई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि रजबहा व जलघर की सफाई का कोई ध्यान नहीं रखा जाता। किनारे पर लंबी झाड़ियां उगी हुई हैं। रजबहा की देखभाल भी नहीं होती। लोग रजबहा में पशुओं को नहलाते हैं। यही पानी जलघर के माध्यम से लोगों के घरों तक पहुंचता है।
ऐसे में ग्रामीण टैंकर खरीदकर काम चलाने को मजबूर हैं। एक टैंकर की कीमत 500 से 1000 रुपये है। पशुओं के साथ परिवार के उपयोग से मुश्किल से एक टैंकर दो दिन निकालता है। जेब पर भी बोझ बढ़ रहा है।
कई बार शिकायत के बाद भी नहीं हुआ समाधान
ग्रामीणों का कहना है कि समस्या को लेकर 10 से अधिक बार समाधान शिविर में पहुंचे हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। जनस्वास्थ्य विभाग में भी गए, लेकिन वहां से भी केवल आश्वासन ही मिला है, कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ये बोले ग्रामीण:
जलघर तक पानी पहुंचाने वाले रजबहा में लोग पशु नहलाते हैं। दूषित पानी जलघर पहुंचता है। सप्लाई में गंदा पीला पानी आता है। कई बार शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं हो रहा। - अमित, सुनारिया
समाधान शिविर में भी अनेकों बार शिकायत दे चुके हैं, लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ। रजबहा व जलघर में सफाई का बुरा हाल है। लंबी झाड़ियां उगी हैं। - मैनपाल, सुनारिया
एक टैंकर 500 से 1000 रुपये तक का पड़ता है। जेब पर भी बोझ बढ़ रहा है। पशु होने के कारण दो दिन ही टैंकर चल पाता है। कई शिकायतों के बाद भी समाधान नहीं हुआ। - सुरेंद्र कुमार, सुनारिया
एक साल से अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। कई बार शिकायत भी की है, लेकिन कोई समाधान नहीं होता। जलघर व रजबहा का कोई ध्यान नहीं रखा जाता है। ऐसे में ग्रामीण परेशान हो रहे हैं। - सुमन, पार्षद, सुनारिया कलां
वर्जन
गांव वाले ही रजबहा के पानी को गंदा कर रहे हैं। इस बारे में अनेक बार लोगों को समझाया जा चुका है। जलघर के कर्मचारियों को भी बार-बार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। - संदीप कुमार, कार्यकारी अभियंता रोहतक, जनस्वास्थ्य विभाग
11 गांव सुनारिया के रजबहा में पशु नहलाता युवक। स्रोत: ग्रामीण