रोहतक। जिला उपभोक्ता आयोग ने दुर्घटनाग्रस्त कार की डिलीवरी में देरी के पुख्ता सबूत न मिलने पर उपभोक्ता सलारा मोहल्ला निवासी सीलवंती की मुआवजे की अर्जी सात अप्रैल को खारिज कर दी। आयोग के चेयरमैन नागेंद्र सिंह कादियान ने कहा है कि फाॅर्म में उपभोक्ता को सेवा में कमी को लेकर टिप्पणी करनी चाहिए थी।
आयोग के मुताबिक, कार मालिक सीलवंती ने याचिका दायर की थी कि विटारा ब्रेजा कार के लिए 30 मई 2019 से 29 मई 2022 तक की अवधि के लिए बीमा पॉलिसी ली थी। जनवरी 2021 में कार पहरावर गांव के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी।
उन्होंने मारुति की वर्कशाॅप में मरम्मत के लिए कार भेज दी। एक माह में मरम्मत करने का आश्वासन मिला था। बीमा कंपनी ने सर्वे किया। उन्हें एक माह के बजाय 12-13 दिन देरी से कार ठीक करके दी गई। इस कारण उन्हें 40 हजार रुपये का नुकसान हुआ था।
उपभोक्ता ने कहा कि कार में लगी खरोंच की मरम्मत भी बाकी थी। इसे ठीक करने के लिए 10 हजार रुपये की मांग की गई। संतोषजनक जवाब न मिलने पर कार मालिक ने जिला उपभोक्ता आयोग में अर्जी दायर की।
मरम्मत से संतुष्टि नहीं होने पर भी टिप्पणी वाला कॉलम खाली छोड़ा था खाली
रिकाॅर्ड की जांच करने पर आयोग को पता चला है कि शिकायतकर्ता ने फीडबैक कॉलम में 10 रेटिंग दी है। इतना नहीं, अगर वाहन मालिक कार की मरम्मत से संतुष्ट नहीं था तो टिप्पणी वाला कॉलम खाली नहीं छोड़ना चाहिए था। उस समय बिना आपत्ति के वाहन मालिक ने कार ले ली थी। ऐसे कोई दस्तावेज भी नहीं दिए जिससे साबित हो कि वाहन मिलने में देरी से 40 हजार का नुकसान हुआ।