- 112 पार्टी नेता थे जिलाध्यक्ष बनने की दौड़ में
माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। कांग्रेस ने अपने गढ़ रोहतक में जिला इकाइयों की कमान नॉन जाट को सौंपी है। 11 साल बाद मंगलवार को घोषित जिलाध्यक्षों में सैन समाज के कुलदीप उर्फ केडी को शहरी इकाई का जिम्मा मिला है तो पूर्व सरपंच बलवान सिंह रंगा (दलित) को ग्रामीण इकाई का। दोनों ही पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी हैं।
कांग्रेस ने मैराथन मंथन के बाद आखिरकर मंगलवार की रात जिलाध्यक्षों की सूची से पर्दा हटा ही दिया। इसके लिए पार्टी ने लंबी जद्दोजहद, कार्यकर्ताओं की भागीदारी और निष्पक्ष चिंतन-मनन का दावा जरूर किया लेकिन परिणाम लेकिन जिन नेताओं को यह जिम्मा मिला है, वह चौंकाने वाला कतई नहीं।
यह शुरू से ही तय था और जैसा कि केंद्रीय पर्यवेक्षक ने भी पहली ही बैठक में सपाट भाव से कह दिया था कि रोहतक में तो वही जिलाध्यक्ष बनेगा, जिसे भूपेंद्र सिंह डुड्डा कहेंगे। ऐसा इसलिए भी था कि यहां कांग्रेस का मतलब भी सिर्फ भूपेंद्र सिंह हुड्डा ही हैं।
उन्हीं के बूते बगैर संगठन के भी जिले के चारों विधायक कांग्रेस के ही जीते हैं। यही नहीं, लोकसभा सीट भी भाजपा से वापस छीन ली है। इसी कारण केंद्रीय पर्यवेक्षक ने खुले मंच से इसे स्वीकार किया।
इस घोषणा के बाद यहां के जिलाध्यक्षों के चुनाव की प्रक्रिया सिर्फ औपचारिकता ही लग रही थी। बावजूद इसके ग्रामीण व शहरी जिलाध्यक्षों के लिए 112 नेताओं ने दावा किया। इतनी बड़ी दावेदारी सबके लिए हैरान करने वाली थी। इतने नेताओं में पूर्व सीएम की कृपा किस पर बरसेगी, यह जरूर देखने वाला था।
मंगलवार को तिलकनगर में रहने वाले निष्ठावान कार्यकर्ता कुलदीप केडी को शहर और घिलौड़ कलां गांव के पूर्व सरपंच बलवान सिंह रंगा को ग्रामीण इकाई का जिलाध्यक्ष बनाने के साथ इसका भी रहस्योद्घाटन हो गया।
सैन समाज के केडी और दलित समाज के रंगा को जिम्मा देकर पार्टी ने दलित-पिछड़ा वर्ग को मजबूती से जोड़ने का जतन किया है। कांग्रेस जानती है कि भाजपा ने दलित-पिछड़ा वर्ग को जोड़कर ही फिर सत्ता पाई है। इसी कारण कांग्रेस ने भी जातीय गोलबंदी का ख्याल रखा।
वैसे, रोहतक शहर में बहुतायत वाले पंजाबी समुदाय से भारत भूषण बतरा विधायक हैं तो गढ़ी सांपला-किलोई से जाट समाज के हुड्डा हैं। महम से जाट समाज के ही बलराज दांगी पहली बार विधायक बने हैं। कलानौर की सुरक्षित सीट से एससी वर्ग की शकुंतला खटक विधायक हैं।
यह सर्वविदित है कि जाट समाज हुड्डा के पीछे खड़ा ही है, भाजपा को रोकने के लिए जरूरत अन्य वर्गों को मजबूती से जोड़े रखने की है। इसी कारण भाजपा की तरफ खिसक रहे नॉन जाट वोट बैंक का कार्ड कांग्रेस ने खेला है।
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जाट-पंजाबी समाज के नेता भी थे दौड़ में
जिला अध्यक्ष बनने के लिए शहर में पंजाबी समाज के व्यापारी नेताओं से लेकर पूर्व पार्षद तक दौड़ में थे। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र में जाट समाज के नेता भी जिलाध्यक्ष बनने के लिए जोर लगा रहे थे।
राहुल गांधी के साथ कुलदीप केडी। स्रोत : स्वयं- फोटो : राहुल गांधी के साथ कुलदीप केडी। स्रोत : स्वयं