सीएम मनोहर लाल ने प्रदेश के 9 निगमों के मेयर, पार्षद व पार्टी पदाधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये कोरोना राहत कार्यों के बारे में फीडबैक लिया। मेयर मनमोहन गोयल ने कहा कि बाकी कार्य तो सही चल रहे हैं, लेकिन शहर में ऐसे सैकड़ों ग्रीन कार्ड धारक हैं, जो अब भी सरकारी राशन या दूसरी सहायता से वंचित हैं। मुख्यमंत्री ने इस पर हैरत जताई और मेयर से 10 ऐसे जरूरतमंदों के नाम मांगे, जो वंचित हैं। साथ ही कहा, अगर ये 10 केस सही मिलते हैं तो अधिकारियों से न केवल जवाब मांगा जाएगा, बल्कि हर जरूरतमंद को सहायता पहुंचाई जाएगी।
एक दिन पहले तय हुआ था कि मुख्यमंत्री मनोहर रविवार को 11 बजे से प्रदेश के सभी नौ निगमों फरीदाबाद, गुड़गांव, रोहतक, सोनीपत, पानीपत, करनाल, यमुना नगर, पंचकूला व हिसार के मेयर, पार्षद व पार्टी के जिला अध्यक्ष वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बात करेंगे। इसके लिए रोहतक में प्रदेश कार्यालय में वीसी सिस्टम की व्यवस्था की गई थी। भाजपा के 20 पार्षद मेयर, जिला अध्यक्ष, महिला महामंत्री धर्मबीर शर्मा व सतीश आहूजा, सभी मंडल अध्यक्ष पार्टी कार्यालय पहुंचे। सीएम ने कोरोना संकट के समय राशन वितरण को लेकर बात करना शुरू किया। यमुनागर से मेयर से बात की तो पानीपत में पार्टी के जिला अध्यक्ष से, करनाल में मेयर से तो गुड़गांव में जिला अध्यक्ष से बात की। रोहतक में मेयर मनमोन गोयल से बात की। सीएम ने कोरोना संकट में वंचितों तक राशन पहुंचने के बारे में पूछा। मेयर के मुताबिक उन्होंने बताया कि प्रवासी श्रमिकों के लिए अच्छी तरह सहायता राशि भिजवाई गई, लेकिन शहर में ऐसे बहुत से ग्रीन कार्ड धारक हैं, जो अब भी राशन या सरकारी मदद से वंचित हैं। सीएम ने कहा कि उनको फिलहाल 10 केस भेजो। वे केसों की जांच करवाएंगे। अगर वे जांच में वंचित मिले तो अधिकारियों से पूछा जाएगा, आखिर ये लोग कैसे छूट गए। साथ ही हर बचे वंचित तक राशन व सहायता पहुंचाई जाएगी।
सीनियर व डिप्टी मेयर के चुनाव कब होंगे, मेयर ने सीएम से पूछा
मेयर ने सीएम को बताया कि डेढ़ साल पहले निगम के चुनाव हुए थे। अब तक सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर का चुनाव नहीं हुआ। पार्षद बार-बार सवाल करते हैं। सीएम ने कहा कि इस संबंध में वे पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री सुरेश भट्ठ से मिलें और अपना प्रस्ताव रखें।
मेयर ने वार्ड 2, 5 व 19 से मांगे केस
वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम मेयर ने वार्ड 2,5 व 19 के पार्षदों से ऐसे लोगों की सूची मांगी है, जो जरूरतमंद हैं, लेकिन ग्रीन कार्ड धारक होने के कारण उसको सरकारी सहायता या राशन नहीं मिला है।